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टाइम्स ऑफ़ राजस्थान ई-पेपर — शनिवार, 24 अक्टूबर 2026

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राजस्थान

प्रदेश के चयनित 32 जिलों में 22 नवम्बर को आयोजित होगा उप राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान

5 वर्ष तक के 92.83 लाख बच्चों को पिलाई जाएगी पोलियो की खुराक, मिशन निदेशक ने सभी संबंधित विभागों को समन्वय के साथ समय पर तैयारियां पूरी करने के दिए निर्देश

जयपुर, 23 अक्टूबर। राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत स्टेट टास्क फोर्स की बैठक शुक्रवार को स्वास्थ्य भवन में मिशन निदेशक एनएचएम डॉ. जोगाराम की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में आगामी 22 नवम्बर को प्रदेश के चयनित 32 जिलों में आयोजित होने वाले उप राष्ट्रीय पल्स पोलियो अभियान की तैयारियों की समीक्षा की गई। मिशन निदेशक ने अभियान की सफलता के लिए सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ समय रहते आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए।

डॉ. जोगाराम ने कहा कि अभियान को सफल बनाने के लिए प्रत्येक स्तर पर समन्वय स्थापित करते हुए अभी से तैयारियां शुरू की जाएं। उन्होंने बताया कि चयनित 32 जिलों में 5 वर्ष तक की आयु के 92 लाख 83 हजार बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने अभियान में तैनात किए जाने वाले कार्मिकों का समय पर प्रशिक्षण सुनिश्चित करने तथा जिलों में आवश्यक तैयारियों और प्रबंधन के लिए गठित समितियों की बैठकें आयोजित कर व्यापक कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

अभियान प्रदेश के अजमेर, अलवर, बांसवाड़ा, बाड़मेर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चित्तौड़गढ़, चूरू, दौसा, धौलपुर, डूंगरपुर, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झालावाड़, झुंझुनूं, जोधपुर, कोटा, कोटपुतली-बहरोड़, नागौर, पाली, राजसमंद, सवाईमाधोपुर, सलूम्बर, सीकर, सिरोही, टोंक एवं उदयपुर में आयोजित किया जाएगा।

एचपीवी टीकाकरण की प्रगति की समीक्षा—

बैठक में मिशन निदेशक ने एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम की प्रगति की भी समीक्षा की। उन्होंने 75 प्रतिशत से कम प्रगति वाले जिलों में विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। इसके लिए स्कूलों और कॉलेजों में आवश्यक जानकारी सत्र आयोजित कर लक्षित लाभार्थियों को टीकाकरण के लिए प्रेरित करने को कहा। उन्होंने पंचायती राज विभाग एवं शिक्षा विभाग के स्थानीय अधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर लक्षित वर्ग तक पहुंच सुनिश्चित करने और टीकाकरण से लाभान्वित करने के निर्देश दिए।

बैठक में निदेशक आरसीएच डॉ. मधु रतेश्वर, परियोजना निदेशक टीकाकरण डॉ. रघुराज सिंह सहित संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में महिला एवं बाल विकास विभाग, सूचना एवं जनसम्पर्क विभाग, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग, डब्ल्यूएचओ, यूनिसेफ तथा अन्य विकास सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।

ओटाराम/अभिषेक

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कृषि-मंडी

कृषि आदानों की गुणवत्ता जांच में राजस्थान सरकार की ऐतिहासिक पहल

अब कृषि आदानों के नमूनों की जांच होगी फेसलेस, कॉन्टैक्टलेस और पारदर्शी कृषि विभाग एवं डाक विभाग के बीच महत्वपूर्ण समझौता, किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक एवं कीटनाशक उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम

जयपुर, 23 अक्टूबर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की भ्रष्टाचार के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति की अनुपालना में कृषि विभाग ने किसानों के हितों की सुरक्षा, कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने तथा कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता एवं जवाबदेही को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल की है।

कृषि विभाग ने प्रदेश में बीज, उर्वरक एवं कीटनाशक रसायनों के नमूनों की जांच प्रक्रिया को अधिक निष्पक्ष, गोपनीय, पारदर्शी एवं तकनीक आधारित बनाने के उद्देश्य से शुक्रवार को पंत कृषि भवन में कृषि विभाग, राजस्थान सरकार एवं भारतीय डाक विभाग (राजस्थान परिमण्डल) के मध्य एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) साइन किया गया।

इस समझौते के माध्यम से कृषि आदानों के नमूने एकत्र करने से लेकर उन्हें प्रयोगशालाओं तक पहुंचाने, परीक्षण करने तथा जांच परिणाम जारी करने की प्रक्रिया को डिजिटल एवं व्यवस्थित बनाया जाएगा।

इस पहल की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि नमूना लेने वाले निरीक्षक को यह जानकारी नहीं होगी कि नमूना किस प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा और प्रयोगशाला को भी संबंधित डीलर अथवा निर्माता की पहचान की जानकारी नहीं होगी।

कृषि आदानों की जांच व्यवस्था में बड़ा सुधार—

वर्तमान में कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए विभाग द्वारा विभिन्न स्तरों पर नमूने लेकर प्रयोगशालाओं में जांच कराई जाती है। इस प्रक्रिया में नमूनों के संग्रहण, पैकिंग, परिवहन, प्रयोगशाला आवंटन तथा परीक्षण परिणामों के प्रबंधन में अनेक स्तरों पर मानवीय हस्तक्षेप की संभावना रहती है। नई व्यवस्था में AgriQMS मोबाइल ऐप एवं भारतीय डाक विभाग की स्पीड पोस्ट सेवाओं के माध्यम से पूरी प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और पारदर्शी बनाया जाएगा। इससे नमूनों की अदला-बदली, पहचान उजागर होने, अनावश्यक देरी तथा परीक्षण प्रक्रिया को प्रभावित करने जैसी संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में सहायता मिलेगी।

निरीक्षक मौके पर ही डिजिटल माध्यम से लेंगे नमूने

नई व्यवस्था के अंतर्गत कृषि आदान निरीक्षक AgriQMS मोबाइल ऐप के माध्यम से मौके पर ही नमूना संग्रहण की प्रक्रिया पूरी करेंगे।

नमूना लेते समय नमूना संग्रहण स्थल की जीपीएस आधारित जियो-टैगिंग की जाएगी तथा संबंधित उत्पाद की तस्वीरें, उत्पाद के विवरण एवं आवश्यक दस्तावेज डिजिटली लिए जाएंगे। नमूने की पहचान के लिए सिस्टम द्वारा क्यूआर कोड जनरेट किया जाएगा। साथ ही नमूने को सुरक्षित रखने के लिए टैम्पर-प्रूफ पैकिंग की जाएगी।

इस व्यवस्था से नमूना संग्रहण का डिजिटल रेकार्ड उपलब्ध होगा तथा बाद में रेकार्ड में अनधिकृत बदलाव अथवा नमूने से छेड़छाड़ की संभावनाओं को कम किया जा सकेगा।

निरीक्षक अपनी पसंद की प्रयोगशाला में नहीं भेज सकेंगे नमूने—

नई व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता प्रयोगशालाओं का 'सिस्टम आधारित रैंडम आवंटन' है। इसमें AgriQMS प्रणाली स्वतः निर्धारित करेगी कि नमूना किस अधिकृत प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। इससे किसी विशेष प्रयोगशाला के चयन में व्यक्तिगत हस्तक्षेप की संभावना समाप्त करने में सहायता मिलेगी। साथ ही प्रयोगशाला को नमूने से संबंधित डीलर अथवा निर्माता की पहचान उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। यह दोहरी गोपनीयता व्यवस्था परीक्षण प्रक्रिया की निष्पक्षता एवं विश्वसनीयता को मजबूत करेगी।

भारतीय डाक विभाग के माध्यम से नमूनों का सुरक्षित परिवहन—

समझौते के अंतर्गत कृषि विभाग द्वारा डाक विभाग को जयपुर में भेजा जाएगा, वहां पर नमूनों की पहचान को मास्क किया जाएगा। इसके बाद डाक विभाग प्रदेशभर से एकत्र किए गए नमूनों को स्पीड पोस्ट एवं बिजनेस पोस्ट सेंटर सेवाओं के माध्यम से अधिकृत प्रयोगशालाओं तक पहुंचाएगा। डाक विभाग नमूनों की ट्रैकिंग की सुविधा प्रदान करेगा।

उक्त समझौता तीन वर्ष की अवधि के लिए किया गया है, जिसे आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा। भारतीय डाक विभाग द्वारा कृषि विभाग को Book Now Pay Later (BNPL) सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

किसानों को मिलेंगे महत्वपूर्ण लाभ—

इस नई व्यवस्था का सबसे बड़ा लाभ प्रदेश के किसानों को मिलेगा। कृषि उत्पादन एवं किसानों की आय काफी हद तक गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक एवं कीटनाशकों की उपलब्धता पर निर्भर करती है। नकली, अमानक अथवा घटिया कृषि आदानों के उपयोग से किसानों को आर्थिक नुकसान होने के साथ-साथ फसलों की उत्पादकता भी प्रभावित हो सकती है।

नई डिजिटल गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था से किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। निष्पक्ष जांच से अमानक उत्पादों की पहचान एवं उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई अधिक प्रभावी हो सकेगी।

किसानों के आर्थिक हितों की सुरक्षा होगी: घटिया बीज, उर्वरक एवं कीटनाशकों की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण से फसल नुकसान के जोखिम को कम करने में सहायता मिलेगी।

कृषि आदानों के प्रति विश्वास बढ़ेगा: जांच प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ने से किसानों का कृषि विभाग की गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा। ईमानदार विक्रेताओं एवं निर्माताओं को लाभ मिलेगा: निष्पक्ष जांच से गुणवत्तापूर्ण उत्पाद उपलब्ध कराने वाले व्यापारियों को समान अवसर प्राप्त होंगे।

कृषि उत्पादकता में सुधार को बढ़ावा मिलेगा: गुणवत्तापूर्ण कृषि आदानों की उपलब्धता से बेहतर फसल उत्पादन एवं किसानों की आय बढ़ाने के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।

भ्रष्टाचार एवं मिलीभगत की संभावनाओं पर प्रभावी नियंत्रण—

नई व्यवस्था कृषि आदानों के गुणवत्ता नियंत्रण में सुशासन का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बनेगी। फेसलेस एवं कॉन्टैक्टलेस प्रणाली से नमूना संग्रहण, प्रयोगशाला आवंटन तथा परीक्षण के दौरान अनावश्यक व्यक्तिगत संपर्क एवं प्रभाव की संभावनाएं कम होंगी। सिस्टम आधारित प्रयोगशाला आवंटन से किसी विशेष नमूने को मनचाही प्रयोगशाला में भेजने की संभावना को नियंत्रित किया जा सकेगा। डिजिटल हस्ताक्षर, जियो-टैगिंग, QR कोड एवं टैम्पर-प्रूफ पैकिंग से नमूना संग्रहण की प्रामाणिकता बढ़ेगी।

ऑनलाइन परीक्षण परिणाम एवं डिजिटल अभिलेखों से जवाबदेही सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी। इस प्रकार नई व्यवस्था केवल नमूनों के परिवहन में सुधार नहीं, बल्कि कृषि गुणवत्ता नियंत्रण की संपूर्ण कार्यप्रणाली को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में एक व्यापक प्रशासनिक सुधार है। इससे संबंधित पक्षों को निष्पक्ष परीक्षण एवं पुनः परीक्षण की निर्धारित प्रक्रिया का लाभ मिल सकेगा।

डिजिटल गवर्नेंस एवं ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा—

डिजिटल अभिलेखों एवं ऑनलाइन परीक्षण प्रक्रिया से प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी तथा गुणवत्ता नियंत्रण गतिविधियों की निगरानी बेहतर होगी। साथ ही ईमानदार कृषि आदान निर्माताओं एवं विक्रेताओं को पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच व्यवस्था का लाभ मिलेगा। यह पहल राजस्थान में डिजिटल गवर्नेंस, सुशासन एवं ईज ऑफ डूइंग बिजन

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देश

डीडीडब्ल्यूएस ने जल जीवन मिशन 2.0 के तहत सामुदायिक नेतृत्व वाले ग्रामीण पेयजल प्रबंधन को मजबूत करने के लिए प्रशिक्षकों की राष्ट्रीय स्तरीय ट्रेनिंग का आयोजन…

जल शक्ति मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल एवं स्वच्छता विभाग ( डीडीडब्ल्यूएस ) ने आज नई दिल्ली के इंडिया हैबिटेट सेंटर में जल जीवन मिशन (जेजेएम ) 2.0 के तहत राज्य-स्तरीय प्रशिक्षकों के लिए एक राष्ट्रीय स्तरीय प्रशिक्षण कार्यक्रम (टीओटी) आयोजित किया। इस कार्यक्रम में राज्य ग्रामीण विकास संस्थानों (एसआईआरडी ), जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभागों (पीएचईडी ), ग्रामीण विकास संस्थाओं और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के अन्य प्रमुख हितधारकों के प्रतिनिधि शामिल हुए। इसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर सामुदायिक प्रशिक्षण और संस्थागत विकास के लिए क्षमता बढ़ाना है , ताकि पूरे देश में ग्रामीण पेयजल सेवाओं को लंबे समय तक स्थाई बनाए रखा जा सके।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जल जीवन मिशन 2.0 क्षमता निर्माण पैकेज पर केंद्रित था। इसमें 8 मॉड्यूल शामिल हैं , जिनमें "द स्टोरी ऑफ पानीपुर: ग्रामीण पेयजल आपूर्ति प्रबंधन पर कहानी-आधारित स्व-शिक्षण हैंडबुक" और एक “ प्रशिक्षक सुविधा नियमावली ” शामिल हैं। इस पैकेज को ग्राम पंचायत प्रतिनिधियों , ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों (वीडब्ल्यूएससी ), सुजलाम शक्ति समूहों और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल सेवाओं के प्रबंधन व निरंतरता से जुड़ी अन्य जमीनी संस्थाओं की क्षमता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है।

कार्यक्रम में मुख्य संबोधन देते हुए , राष्ट्रीय जल जीवन मिशन के अतिरिक्त सचिव और मिशन निदेशक , श्री कमल किशोर सोन ने इस बात पर जोर दिया कि ग्रामीण पेयजल प्रणालियों की दीर्घकालिक निरंतरता मुख्य रूप से सामुदायिक स्वामित्व और संस्थागत जिम्मेदारी पर निर्भर करती है। आज जो पेयजल बुनियादी ढांचा तैयार किया जा रहा है , उसका उद्देश्य आने वाले कई दशकों तक ग्रामीण समुदायों को सेवा प्रदान करना है। इसलिए , इसमें शुरुआत से ही ग्राम पंचायतों , ग्राम जल एवं स्वच्छता समितियों और सामुदायिक समूहों की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को हासिल करने के लिए न केवल बुनियादी ढांचे के निर्माण की आवश्यकता है , बल्कि मजबूत स्थानीय संस्थाओं के माध्यम से इसके प्रभावी संचालन और रखरखाव को सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों की भी जरूरत है।

कई राज्यों में बेहतर सेवा वितरण के उभरते उदाहरणों का जिक्र करते हुए , श्री सोन ने ग्राम स्तरीय संस्थाओं को उच्च सेवा मानकों और जल आपूर्ति प्रणालियों के टिकाऊ प्रबंधन के लिए तैयार करने की ज़रुरत पर प्रकाश डाला। उन्होंने प्रतिभागियों से आग्रह किया कि वे पंचायत प्रतिनिधियों और सामुदायिक संस्थाओं के बीच स्वामित्व की भावना को मजबूत करें , ताकि पेयजल बुनियादी ढांचे को एक ऐसी सामुदायिक संपत्ति के रूप में देखा जाए , जिसे सामूहिक रूप से संरक्षित और बनाए रखा जाना चाहिए।

उनके संबोधन का मुख्य केंद्र जेजेएम को ग्राम पंचायत विकास योजनाओं (जीपीडीपी ), पंचायती राज संस्थाओं और राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए ) के साथ जोड़ना था। साथ ही , उन्होंने 16 वें वित्त आयोग के निर्दिष्ट अनुदानों और वीबी - जी राम जी के संसाधनों को भी इसके साथ एकीकृत करने पर जोर दिया। उन्होंने राज्यों से आग्रह किया कि वे यह सुनिश्चित करें कि पंचायत प्रतिनिधि अपने पास उपलब्ध वित्तीय संसाधनों और नियोजन उपकरणों को अच्छी तरह समझें। इससे जल स्रोतों की निरंतरता , उनके संचालन और रखरखाव की जरूरतों , तथा स्थानीय पेयजल प्राथमिकताओं को विकास योजनाओं में उचित रूप से शामिल किया जा सकेगा।

श्री सोन ने ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणालियों के लंबे समय तक सुचारू रूप से काम करने के लिए उपयोगकर्ता शुल्क वसूलने , वित्तीय स्थिरता बनाए रखने , जल स्रोतों की सुरक्षा करने और सामुदायिक निगरानी की अहमियत पर भी जोर दिया।

उन्होंने प्रशिक्षण कार्यक्रम को संस्थागत रूप देने का आह्वान करते हुए राज्यों से कहा कि वे क्षमता निर्माण मॉड्यूल को मौजूदा ग्रामीण विकास और पंचायती राज प्रशिक्षण प्रणालियों में शामिल करें। इससे मिशन की अवधि समाप्त होने के बाद भी सीखना और क्षमता निर्माण जारी रह सकेगा और यह ग्रामीण पेयजल सेवा वितरण के लिए एक स्थायी सहायता तंत्र का हिस्सा बन जाएगा।

पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाति मीना नाइक ने इस मिशन की दीर्घकालिक सफलता सुनिश्चित करने के लिए क्षमता निर्माण के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल बुनियादी ढांचा तैयार करने के लिए भारी निवेश किया जा रहा है , लेकिन इन परिसंपत्तियों का स्थायित्व इस बात पर निर्भर करता है कि वहां के समुदाय जागरूक हों और स्थानीय संस्थाएं सक्षम हों , जो समय के साथ पेयजल प्रणालियों का प्रभावी ढंग से संचालन , रखरखाव और प्रबंधन कर सकें। प्रशिक्षण के उद्देश्य पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि इसका मकसद केवल तकनीकी ज्ञान देना नहीं है , बल्कि प्रशिक्षकों को इस योग्य बनाना है कि वे जटिल अवधारणाओं को सरल , व्यावहारिक और आसानी से समझ में आने वाले तरीके से ग्रामीण समुदायों तक पहुंचा सकें। उन्होंने बताया कि नए विकसित किए गए प्रशिक्षण मॉड्यूल में कहानी सुनाने , लोक संचार के तरीकों , रोल-प्ले , सामुदायिक बातचीत और खेल-खेल में सीखने जैसी तकनीकों का उपयोग किया गया है , ताकि सीखने की प्रक्रिया अधिक रोचक और प्रभावी बन सके।

उन्होंने कहा कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्षमता निर्माण के माध्यम से ग्रामीण पेयजल प्रणालियों के समुदाय-आधारित प्रबंधन को मजबूत करना है। उम्मीद है कि ग्राम-स्तरीय संस्थाएं जल वितरण , संचालन और रखरखाव , उपयोगकर्ता शुल्क प्रबंधन , शिकायतों के निवारण , प्रणालियों की कार्यक्षमता की निगरानी और सेवाओं में सुधार की योजना बनाने में और भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

श्रीमती नाइक ने डिजिटल प्लेटफॉर्म और डैशबोर्ड के माध्यम से पारदर्शिता और जानकारी तक समान पहुंच के महत्व पर जोर दिया। इससे नागरिकों , ग्राम पंचायतों और उच्च प्रशासनिक स्तरों को कार्यक्रम संबंधी जानकारी एक समान रूप से मिल सकेगी और वे ग्रामीण जल प्रशासन में अधिक प्रभावी ढंग से भाग ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि इस व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम के तहत लगभग 54 लाख हितधारकों को शामिल करने का प्रस्ताव है। उन्होंने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से आग्रह किया कि वे जानकारी के प्रसार के लिए मजबूत तंत्र और प्रशिक्षण व्यवस्था तैयार करें , ताकि कार्यक्रम को समय पर लागू किया जा सके।

श्रीमती मीना ने सुजलाम भारत और विभिन्न स्तरों वाले डैशबोर्ड जैसी पहलों के माध्यम से , तकनीक-आधारित प्रशासन की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने जोर दिया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म को पारदर्शिता , जवाबदेही और सोच-समझकर निर्णय लेने का साधन बनना चाहिए , जिससे ग्राम पंचायतें और नागरिक सेवाओं की डिलीवरी की सक्रिय रूप से निगरानी कर सकें और उसमें सुधार ला सकें। उन्होंने सुजलाम शक्ति समूहों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यह पहल महिलाओं के नेतृत्व , सामुदायिक लामबंदी और आजीविका में सुधार के बड़े अवसर प्रदान करती है , साथ ही जमीनी स्तर पर पेयजल प्रशासन को भी मजबूत करती है।

अपनी समापन टिप्पणी में , एनजेजेएम के

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कोटपूतली-बहरोड़

सड़क सुरक्षा को लेकर जिला प्रशासन सख्त, अवैध कट्स एवं ओवरलोड वाहनों पर होगी कड़ी कार्रवाई

दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय मजबूत करने तथा यातायात नियमों की पालना सुनिश्चित करने के निर्देश पुलिस, परिवहन एवं संबंधित विभाग संयुक्त रूप से चलाएं कार्रवाई और जागरूकता अभियान

कोटपूतली-बहरोड़, 23 अक्टूबर। जिले में सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाने तथा सुरक्षित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला कलेक्टर अपर्णा गुप्ता की अध्यक्षता में शुक्रवार को जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सड़क सुरक्षा से जुड़े विभिन्न बिंदुओं की समीक्षा करते हुए संबंधित विभागों को अवैध कट्स बंद कराने, ओवरलोड वाहनों पर नियंत्रण, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने तथा यातायात नियमों की प्रभावी पालना के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।अधीक्षण अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग जगदीश प्रसाद यादव ने बैठक में दिए गए निर्देशों की अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत करते हुए एजेंडे के अनुसार की गई कार्यवाहियों एवं प्रगति की जानकारी दी।

जिला कलेक्टर अपर्णा गुप्ता ने राष्ट्रीय राजमार्गों एवं प्रमुख मार्गों पर स्थित अवैध कट्स को बंद कराने तथा दोबारा कट खोलने वालों के विरुद्ध नियमानुसार सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने ओवरलोड वाहनों की नियमित जांच के लिए विशेष अभियान चलाने, जिले के प्रवेश मार्गों पर निगरानी बढ़ाने तथा यातायात नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

उन्होंने शहरी क्षेत्रों में यातायात व्यवस्था सुचारू बनाने के लिए पुलिस, परिवहन विभाग, सार्वजनिक निर्माण विभाग एवं भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारियों को आपसी समन्वय से कार्य करने के निर्देश दिए। अवैध पार्किंग एवं सड़क किनारे अतिक्रमण हटाने, ठेले एवं दुकानों को व्यवस्थित करने, पर्याप्त पार्किंग व्यवस्था विकसित करने तथा प्रमुख मार्गों पर संकेतक बोर्ड, मार्ग संकेतक, परावर्तक एवं समुचित प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया।

जिला कलेक्टर ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को चिह्नित कर वहां आवश्यक सुरक्षा उपाय करने तथा सड़क इंजीनियरिंग से संबंधित कमियों को प्राथमिकता से दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने एम्बुलेंस सेवाओं की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने और सड़क दुर्घटनाओं में घायल व्यक्तियों को समय पर प्राथमिक सहायता उपलब्ध कराने के लिए स्कूलों, वाहन चालकों, होमगार्ड एवं नागरिक सुरक्षा कार्मिकों को सीपीआर तथा प्राथमिक उपचार का प्रशिक्षण देने पर भी जोर दिया।

जिला पुलिस अधीक्षक सतवीर सिंह ने नशे की हालत में वाहन चलाने, तेज गति से वाहन चलाने तथा गलत तरीके से ओवरटेक करने वाले वाहन चालकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्गों पर नियमित निगरानी रखने तथा सड़क दुर्घटनाओं से संबंधित आई-रेड पोर्टल पर दर्ज प्रकरणों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करने को कहा।

जिला कलेक्टर ने सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया कि सड़क सुरक्षा से जुड़े कार्यों में आपसी समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करें। आमजन एवं वाहन चालकों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक करने के लिए नियमित अभियान संचालित किए जाएं, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के साथ सुरक्षित यातायात व्यवस्था को मजबूत किया जा सके।

बैठक में अतिरिक्त जिला कलेक्टर सोहन सिंह नरुका, सीएमएचओ डॉ आशीष सिंह शेखावत, एसई पीडब्ल्यूडी जगदीश प्रसाद यादव, एसई जेवीवीएनएल राधेश्याम बंसल, डीटीओ सुनील कुमार सैनी सहित संबंधित विभागों के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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बूंदी

बूंदी में मतदान दलों का द्वितीय रेंडमाइजेशन संपन्न

बूंदी, 23 अक्टूबर को पंचायतीराज आम चुनाव-2026 के तहत जिले में होने वाले तीसरे और चौथे चरण के शांतिपूर्ण व निष्पक्ष मतदान के लिए एनआईसी कक्ष में जिला निर्वाचन अधिकारी (जिला कलक्टर) हरफूल सिंह यादव की उपस्थिति में मतदान दलों में नियोजित अधिकारियों का द्वितीय रेंडमाइजेशन संपन्न हुआ।

सूचना एवं विज्ञान अधिकारी विकास मीणा के अनुसार, कंप्यूटरीकृत प्रक्रिया के जरिए तालेड़ा पंचायत समिति के लिए मतदान दल क्रमांक 1 से 143 तक, बूंदी पंचायत समिति के लिए 144 से 216 तक, हिण्‍डोली पंचायत समिति के लिए 217 से 314 तक, केशवरायपाटन पंचायत समिति के लिए 315 से 403 तक, नैनवां पंचायत समिति के लिए 404 से 536 तक, खटकड़ पंचायत समिति के लिए 537 से 603 तक, दबलाना पंचायत समिति के लिए 604 से 697 तक, तथा लाखेरी पंचायत समिति के लिए 698 से 796 तक विभिन्न मतदान दलों का गठन किया गया।

रेंडमाइजेशन में शामिल अधिकारी

साथ ही पंचायत समिति तालेड़ा में क्रमांक 1 से 40 तक, बूंदी पंचायत समिति के लिए 41 से 64 तक, हिण्‍डोली पंचायत समिति के लिए 65 से 93 तक, केशवरायपाटन पंचायत समिति के लिए 94 से 119 तक, नैनवां पंचायत समिति के लिए 120 से 158 तक, खटकड़ पंचायत समिति के लिए 159 से 181 तक, दबलाना पंचायत समिति के लिए 182 से 207 तक, तथा लाखेरी पंचायत समिति के लिए 208 से 235 तक के रिर्टनिंग अधिकारी शामिल हैं।

द्वितीय रेंडमाइजेशन की प्रक्रिया के दौरान उप जिला निर्वाचन अधिकारी एच.डी. सिंह, जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) चारू सहित अन्य संबंधित अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद रहे।

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श्रीगंगानगर

श्रीगंगानगर में पीओ व एपीओ प्रथम के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

श्रीगंगानगर, 23 अक्टूबर – राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जिले में पंचायती राज आम चुनाव के तहत शुक्रवार को डीएवी उच्च माध्यमिक विद्यालय श्रीगंगानगर में पीओ व एपीओ प्रथम के लिये प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।

जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव के निर्देशानुसार इस दौरान कार्मिकों को पंचायती राज आम चुनाव के तहत निर्वाचन कार्यों एवं गतिविधियों की विस्तारपूर्वक जानकारी देते हुए आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण का दायरा

ईवीएम और मतपेटी से संबंधित प्रायोगिक प्रशिक्षण भी दिया गया। इस दौरान प्रशिक्षण प्रकोष्ठ के सहायक प्रभारी अधिकारी श्री सुरेन्द्र कुमार सोनी और श्री राजन शर्मा सहित अन्य उपस्थित रहे।

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संक्षेप में

श्रीगंगानगर में डाक मतपत्र प्रकोष्ठ के कार्मिकों को प्रशिक्षण

पंचायतीराज चुनाव 2026: मतदान दल राजकीय एलबीएस महाविद्यालय कोटपूतली से रवाना

पीएम स्वनिधि योजना ने बदली अजय की जिंदगी

बुंदी में 152 सेक्टर अधिकारियों का चुनावी प्रशिक्षण समाप्त

कृषि विज्ञान केंद्र पदमपुर के दौरे पर रहे कुलगुरु

चारू मीणा एपीआरओ से बनीं पीआरओ, जयपुर कलेक्ट्रेट में संभाला कार्यभार

टाइम्स ऑफ़ राजस्थान · मुख्य पृष्ठशनिवार, 24 अक्टूबर 2026 · पृष्ठ 1

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राजस्थान री बात

हर दिन मरुधरा की एक कहावत, एक सबद, एक ज़िलो

आज री कहावत

“पाणी पीजे छाण कर, गुरु कीजे जाण कर”

पानी छानकर पियो और गुरु सोच-समझकर बनाओ।

आज रो सबद

मनवार

मेहमान को प्रेम से आग्रह करके खिलाना-पिलाना

आज रो ज़िलो

चित्तौड़गढ़

  • चित्तौड़गढ़ किला
  • विजय स्तंभ
  • मीरा बाई

मेळा-तेवार

इस महीने: पुष्कर मेला, बूंदी उत्सव

कुंभलगढ़ महोत्सव

राजसमंद · दिसंबर

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