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E-PAPER · ई-पेपर

Times of Rajasthan e-paper — 7 November 2026

Rajasthan edition · 6 pages

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जयपुर
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ई-पेपर
पृष्ठ 1

बूंदी

निर्वाचन पर्यवेक्षक भावना शर्मा ने तालेड़ा पंचायत में मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया

बूंदी, 5 नवंबर को पंचायती राज चुनाव 2026 के तृतीय चरण में तालेड़ा पंचायत समिति क्षेत्र में सरपंच व वार्ड पंच के शांतिपूर्ण, निष्पक्ष मतदान को सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन पर्यवेक्षक भावना शर्मा ने मतदान केंद्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने डाबी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में स्थापित मतदान केंद्र सहित पाँच ग्राम पंचायतों के 25 बूथों की जाँच की।

पर्यवेक्षक ने मतदान केंद्रों में आवश्यक निर्वाचन व्यवस्थाओं की पूर्ति के निर्देश दिए और आरओ को कड़ाई से कहा कि सरपंच प्रत्याशियों की मतगणना के समय कक्ष में निष्पक्षता का पालन अनिवार्य हो। उन्होंने बैलेट पेपर की कार्यप्रणाली पर भी पीठासीन अधिकारियों से चर्चा की।

निरीक्षण के मुख्य बिंदु

डाबी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय में स्थापित मतदान केंद्र का अवलोकन किया। ग्राम पंचायत सूतड़ा, लक्ष्मीपुरा, खडीपुर, देवरिया, धनेश्वर के 25 बूथों की जाँच की। आरओ को कड़ाई से निर्देश दिया कि मतगणना के दौरान निष्पक्षता सुनिश्चित हो। बैलेट पेपर की प्रक्रिया पर अधिकारियों से संवाद किया।

इस निरीक्षण का उद्देश्य मतदान प्रक्रिया को स्वतंत्र, निष्पक्ष और सुगम बनाना है, जिससे स्थानीय मतदाताओं को बिना किसी बाधा के अपना मताधिकार प्रयोग करने का अवसर मिले।

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प्रतापगढ़

प्रतापगढ़ में पंच‑सरपंच चुनाव शांतिपूर्ण रूप से संपन्न, दलोट में 88.25% मतदान

प्रतापगढ़ जिले में तृतीय चरण के पंचायत समिति चुनाव गुरुवार को शांतिपूर्ण रूप से संपन्न हुए। छोटी सादड़ी, धमोत्तर, धरियावद और दलोट में पंच‑सरपंच पदों के लिए मतदान हुआ, जिसमें दलोट में 88.25 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

जिला निर्वाचन अधिकारी एवं जिला कलक्टर शुभम चौधरी और पुलिस अधीक्षक विशाल जांगीड़ ने फील्ड में रहकर मतदान केंद्रों का निरन्तर निरीक्षण किया। अतिरिक्त जिला कलक्टर विजयेश कुमार पंड्या, एसडीएम यतींद्र पोरवाल और अन्य अधिकारियों ने भी विभिन्न केंद्रों पर सुरक्षा और सुविधा की जाँच की।

मतदान प्रतिशत और सहभागिता

सांख्यिकी प्रकोष्ठ के आंकड़ों के अनुसार, कुल 84.69 प्रतिशत मतदाताओं ने मतदान किया। छोटी सादड़ी में 86.21%, धमोत्तर में 83.53%, धरियावद में 82.77% और दलोट में 88.25% मतदान हुआ।

छोटी सादड़ी: 89,270 में से 76,961 मतदाता (86.21%) धमोत्तर: 75,447 में से 75,447 मतदाता (83.53%) धरियावद: 1,34,160 में से 1,11,046 मतदाता (82.77%) दलोट: 59,192 में से 52,234 मतदाता (88.25%)

प्रशासनिक व्यवस्था

प्रशासन और पुलिस की टीमें मतदान प्रक्रिया के दौरान सक्रिय रहीं। सभी केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था, मतदाता सुविधा और मतदान प्रक्रिया का निरीक्षण किया गया, जिससे शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित हुआ।

आगे क्या

जिला परिषद और पंचायत समिति वार्डों की मतगणना 20 नवंबर को होगी, जबकि जिला प्रमुख का निर्वाचन 25 नवंबर को निर्धारित है।

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डीग

डीग में पंचायतीराज चुनाव 2026 के तृतीय चरण में 53 बूथों का निरीक्षण

डीग में गुरुवार को पंचायतीराज आम चुनाव 2026 के तृतीय चरण के तहत बृजनगर, कामां एवं पहाड़ी पंचायत समिति क्षेत्रों में सरपंच एवं वार्ड पंच पदों के लिए मतदान हो रहा है।

जिला निर्वाचन अधिकारी मयंक मनीष और जिला पुलिस अधीक्षक कांबले शरण गोपीनाथ ने 16 मतदान केंद्रों पर कुल 53 बूथों का निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान देखे गए मतदान केंद्र

निरीक्षण में राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय रसिया (3 बूथ), महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय सुन्द्रावली (4 बूथ), महात्मा गांधी गवर्नमेंट स्कूल मुड़िया (3 बूथ), राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय पुनाय (3 बूथ), राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बेला (2 बूथ), राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय झांतली (2 बूथ), महात्मा गांधी गवर्नमेंट स्कूल जोतरुहल्ला (4 बूथ), महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय लाडमका (3 बूथ), राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय धीमरी (3 बूथ), श्री बाबूनाथ स्वामी राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय जुरहरा (6 बूथ), महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय पाई (3 बूथ), राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सोनोखर (3 बूथ), राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय कलावटा (3 बूथ), महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय कठोल (4 बूथ), राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय लाडलाका (2 बूथ) तथा महात्मा गांधी राजकीय विद्यालय सहसन (5 बूथ) शामिल थे।

मतदान की स्थिति

जिला निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, सभी स्थानों पर शांतिपूर्ण मतदान हो रहा है और मतदाता बड़ी संख्या में अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रशासन एवं पुलिस पूरी तरह मुस्तैद हैं ताकि मतदान और मतगणना दोनों ही शांतिपूर्ण एवं निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो सकें।

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स्वास्थ्य

कैंसर की सस्ती दवाएं : नए सीमित मार्जिन का मरीजों पर क्या होगा असर

भारत सरकार की प्राथमिकता हर परिवार को किफायती और गुणवत्तापूर्ण कैंसर उपचार उपलब्ध कराना है। 17 अक्टूबर, 2026 को राष्ट्रीय औषध मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने पेटेंट प्राप्त दवाओं सहित 137 गैर-अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं पर व्यापार मार्जिन को अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) के 30% तक सीमित कर दिया। संशोधित मूल्य 9 नवंबर, 2026 से प्रभावी होंगे। 4 नवंबर, 2026 तक, 70 कंपनियों ने 120 दवाओं के लिए संशोधित एमआरपी की घोषणा की थी, जिसमें सबसे अधिक 96.45% की कमी और 3,357.49 करोड़ रुपये की अनुमानित बचत दर्ज की गई थी। एमआरपी में औसतन कमी 20% से 70% तक है।

कैंसर की दवाओं की कीमतों में औसतन 20% से 70% तक की कमी आई

भारत में कैंसर के इलाज को अधिक किफायती बनाने के लिए सरकार ने देश भर में खुदरा और अस्पताल फार्मेसियों सहित दवा आपूर्ति की कड़ी में अधिक मार्कअप पर सीमा लगा दी है।

कंपनियों ने एमआरपी में औसतन 20% से 70% तक की कमी दर्ज की है। सबसे अधिक कमी 96.45% दर्ज की गई (4 नवंबर, 2026 तक)।

इन एमआरपी में कमी के कारण, अनुमानित बचत 3,357.49 करोड़ रुपये है (4 नवंबर, 2026 तक)। यह अनुमान अप्रैल 2025 से मार्च 2026 तक बेची गई मात्रा पर लागू मूल और संशोधित कीमतों के बीच के अंतर को दर्शाता है।

यह सीमा कैंसर रोधी दवाओं के अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) और खरीद मूल्य के बीच अंतर को लेकर राज्य अधिकारियों, रोगियों और नागरिकों की ओर से उठाई गई चिंताओं के उत्तर में निर्धारित की गई है।

उपभोक्ता एनपीपीए वेबसाइट और आधिकारिक फार्मा सही दाम मोबाइल ऐप दोनों का उपयोग करके कीमतों की पुष्टि कर सकते हैं।

नई कीमतें मार्च 2026 के वितरक मूल्य के आधार पर निर्धारित की गई हैं।

व्यापार मार्जिन क्या है ?

व्यापार मार्जिन वह अंतर है जो निर्माता की ओर से स्टॉक रखने वाले / वितरक से ली जाने वाली कीमत और किसी दवा के लिए रोगी की ओर से भुगतान की जाने वाले अधिकतम मूल्य ( एमआरपी ) के बीच होता है , जिसमें वस्तु एवं सेवा कर ( जीएसटी ) शामिल नहीं होता है। जब यह व्यापार मार्जिन बहुत अधिक होता है , तो आपूर्ति श्रृंखला में भारी मुनाफा जुड़ जाता है। इससे रोगियों के लिए अंतिम लागत बहुत बढ़ जाती है , जिससे पहले से ही महंगी कैंसर की दवाएं निर्माता की ओर से बेची जाने वाली कीमत से कहीं अधिक महंगी हो जाती हैं।

इस आदेश के अनुसार , प्रत्येक दवा का नया अधिकतम खुदरा मूल्य मार्च 2026 के औसत वितरक मूल्य से निर्धारित किया गया है। उस मूल्य पर व्यापार मार्जिन 30% से अधिक नहीं हो सकता है , और उस पर जीएसटी जोड़ा जाएगा।

दवाओं की कीमतों को कैसे नियंत्रित किया जाता है

मरीजों के लिए जीवन रक्षक आवश्यक दवाओं को अधिक किफायती बनाने के लिए , सरकार औषधि ( मूल्य नियंत्रण ) आदेश ( डीपीसीओ ), 2013 के अंतर्गत दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करती है।

यह आवश्यक वस्तु अधिनियम के जनादेश के अंतर्गत है , जिसका उद्देश्य दवाओं की कीमतों को नियंत्रित करना , मुनाफाखोरी को रोकना और यह सुनिश्चित करना है कि जरूरी उपचार किफायती बने रहें।

डीपीसीओ , 2013 के अनुसार दवाओं को दो समूहों में बांटा गया है :

अनुसूचित दवाएं : ये वे दवाएं हैं जो डीपीसीओ , 2013 की पहली अनुसूची में शामिल हैं , जो राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची ( एनएलईएम ), 2022 है। सरकार इनमें से प्रत्येक के लिए अधिकतम मूल्य निर्धारित करती है। एनएलईएम 2022 में 388 दवाएं सूचीबद्ध हैं , जिनमें से 63 कैंसर रोधी दवाएं हैं ।

गैर - अनुसूचित दवाएं : ये वे दवाएं हैं जो डीपीसीओ , 2013 की पहली अनुसूची में शामिल नहीं हैं। अनुसूचित दवाओं के उलट , जिनकी अधिकतम कीमत तय होती है , इनका विनियमन मूल्य निगरानी के माध्यम से किया जाता है : डीपीसीओ , 2013 के अनुच्छेद 20 के अंतर्गत , एक निर्माता बारह महीने में एमआरपी को 10% से अधिक नहीं बढ़ा सकता है , और यदि बढ़ोतरी 10% से अधिक हो जाती है , तो अगले बारह महीने के लिए कीमत को वापस 10% के स्तर पर लाना होगा।

इन निर्धारित आवश्यक दवाओं के साथ - साथ अन्य दवाओं की उच्च कीमतों पर ध्यान देने के लिए , सरकार ने 2019 में 42 गैर - निर्धारित कैंसर - रोधी दवाओं को कवर करते हुए एक व्यापार मार्जिन युक्तिकरण ( टीएमआर ) हस्तक्षेप का प्रायोगिक परीक्षण किया , जिसने रोगियों के लिए लागत को सफलतापूर्वक कम किया।

इसी आधार पर , और खुदरा और अस्पताल की कीमतों के बीच अधिक मार्जिन और अंतर दर्शाने वाले बाजार आंकड़ों के आधार पर , सरकार ने डीपीसीओ , 2013 के अनुच्छेद 19 के तहत अपनी असाधारण जनहित शक्तियों का इस्तेमाल किया। स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के तहत गठित एक विशेषज्ञ समिति की सिफारिश पर , प्राधिकरण ने 17 अक्टूबर , 2026 के अपने आदेश के माध्यम से 137 गैर - अनुसूचित कैंसर रोधी दवाओं ( पेटेंट वाली दवाओं सहित ) को व्यापार मार्जिन युक्तिकरण के अंतर्गत लाया।

राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची क्या है ?

राष्ट्रीय आवश्यक दवाओं की सूची ( एनएलईएम ) भारत के लिए जरूरी , उच्च प्राथमिकता वाली दवाओं की एक आधिकारिक सूची है। इसका नवीनतम संशोधित संस्करण , एनएलईएम 2022, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ . मनसुख मांडविया ने 13 सितंबर , 2022 को सरकार के " सबको दवाई , सस्ती दवाई " के दृष्टिकोण के तहत जारी किया गया था।

इतिहास : इसे पहली बार 1996 में बनाया गया था , फिर 2003, 2011, 2015 और 2022 में अपडेट किया गया।

किसने बनाई : स्टैंडिंग नेशनल कमेटी ऑन मेडिसिन्स ( एसएनसीएम ) नामक एक विशेषज्ञ पैनल ने डॉक्टरों , वैज्ञानिकों , उद्योग विशेषज्ञों से बात करने और डब्ल्यूएचओ मानकों की जांच करने के बाद इसे बनाया।

यह सूची क्यों जरूरी है

कम लागत : परिवारों के लिए चिकित्सा संबंधी खर्चों को कम करने में सहायक।

बेहतर स्वास्थ्य सेवा : दवाओं की सुरक्षा , प्रभावशीलता और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करती है।

बेहतर योजना : सरकारी खरीद , अस्पताल बजट , स्वास्थ्य बीमा और मेडिकल छात्रों के प्रशिक्षण में मार्गदर्शन प्रदान करती है।

आदेश के पीछे कानूनी शक्ति : डीपीसीओ , 2013 का पैराग्राफ 19

सरकार के लिए विशेष शक्तियां : असाधारण परिस्थितियों में , सरकार मानक नियमों से परे जनहित में कार्रवाई कर सकती है।

मूल्य निर्धारण या बदलाव : सरकार को किसी भी दवा के लिए अधिकतम ( सीलिंग ) मूल्य या खुदरा मूल्य निर्धारित करने का अधिकार है , जब तक वह इसे आवश्यक समझती है।

पहले से तय कीमत में बदलाव : यदि कोई कीमत पहले से तय हो चुकी है , तो सरकार थोक मूल्य सूचकांक से जुड़े सामान्य वार्षिक संशोधन की प्रतीक्षा किए बिना , इसे सीधे बढ़ा या घटा सकती है।

नई व्यवस्था कैंसर की दवाओं पर व्यापार मार्जिन को कैसे सीमित करती है

व्यापार मार्जिन अधिकतम खुदरा मूल्य का 30% तक सीमित : व्यापार मार्जिन ( निर्माता की ओर से वितरक से ली गई राशि और रोगी द्वारा भुगतान की गई राशि के बीच का अंतर ) 30% से अधिक नहीं हो सकता।

सभी रूपों पर लागू : यह नियम नीचे सूचीबद्ध सभी कैंसर - रोधी दवाओं पर लागू होता है , चाहे उनकी खुराक या रूप कुछ भी हो ( गोलियां , इंजेक्शन आदि ) और चाहे वे अकेले बेची जाएं या साथ में।

मार्च 2026 की कीमतों के आधार पर : इस

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राजस्थान

दीवाली-छठ पर उत्तर रेलवे ने 22 स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला

उत्सव के दौरान यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए उत्तर रेलवे ने 22 स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया। इन ट्रेनों के मार्ग में दिल्ली, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र और जम्मू के प्रमुख शहर शामिल हैं, और ये 5 नवंबर से 2 दिसंबर तक विभिन्न तिथियों पर चलेंगी।

धनबाद‑दिल्ली मार्ग पर ट्रेन नंबर 03309 7, 14, 21 और 28 नवंबर को चलेगी; वापसी ट्रेन 03310 8, 15, 22 और 29 नवंबर को उपलब्ध होगी। मुजफ्फरपुर‑आनंद विहार के लिए ट्रेन 05283 21 और 28 नवंबर को, और वापसी 05284 22 और 29 नवंबर को निर्धारित है।

राजकोट‑बरेली पर ट्रेन 09569 5, 12, 19 और 26 नवंबर को, और वापसी 09570 7, 14, 21 और 28 नवंबर को चलाएगी। बनारस‑लोकमान्य तिलक टर्मिनस पर 01051 25 नवंबर, 01052 26 नवंबर, 01123 22 और 27 नवंबर तथा 01124 24 और 27 नवंबर को संचालित होंगी।

राजस्थान‑संबंधी स्पेशल ट्रेनें

जयपुर‑हडपसर के बीच ट्रेन 01431 24 और 27 नवंबर को, और वापसी 01432 26 और 29 नवंबर को चलेगी। मालदा‑शकूरबस्ती मार्ग पर 03439 10 नवंबर को, और वापसी 03440 11 नवंबर को निर्धारित है।

अन्य प्रमुख रूट

हावड़ा‑आनंद विहार के लिए 03009 9, 16, 23 और 30 नवंबर को, और वापसी 03010 11, 18, 25 नवंबर तथा 2 दिसंबर को चलेंगे। यूपी‑जम्मू के बीच 04420 6 नवंबर को, 04419 7 नवंबर को चलेंगे। चंडीगढ़‑सहरसा पर 04530 6, 10 और 14 नवंबर को, और वापसी 04529 7, 11 और 15 नवंबर को। श्रीनगर‑श्री माता वैष्णो देवी कटरा पर 04690 और 04689 दोनों 5 और 6 नवंबर को संचालित होंगी।

यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे ट्रेन के रूट, समय और बुकिंग की जानकारी रेलवे हेल्पलाइन 139 या आधिकारिक वेबसाइट/NTES ऐप से पहले ले लें। बुकिंग 8 नवंबर को दोपहर 2 बजे तक ही उपलब्ध होगी और 28 स्टेशनों पर केवल 6 घंटे की रिज़र्वेशन अवधि होगी।

ट्रेन नंबर और तिथियां स्रोत में बताई गई हैं। बुकींग के लिए हेल्पलाइन 139 और NTES ऐप उपयोगी हैं। स्पेशल ट्रेनों की बुकिंग सीमित समय के लिए खुली है।

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विचार

भू-यथार्थ की कमी: राजस्थान के जल डेटा में वास्तविक संरचनात्मक संकट क्यों छुपा है

बाँध प्रत्येक मौसम में कितने भरते हैं दिखाते हैं और लिफ्ट‑नहरें जिलों में हजारों किलोमीटर तक फैली होती हैं। सरकारी पुस्तकों में जल निकासी और सिंचाई नहरों पर खर्च भी दिखता है। यदि आप नागौर के सूखे‑भूमि किसान, जोधपुर के औद्योगिक योजनाकार या बीकानेर के ऐसे निवासी से बात करें जो गर्मियों में टैंकर आपूर्ति का प्रबंध करता है, तो आपको बहुत अलग कहानी सुनने को मिलेगी। मुख्य कमजोरी जो अगले बीस वर्षों में राजस्थान की अर्थव्यवस्था को चोट पहुँचाएगी, वह केवल जल की कमी नहीं है। बल्कि यह है कि हम जल को मापने, देने और शुल्क लेने के तरीके जल के व्यवहार से जुड़े नहीं हैं

समस्या तब शुरू होती है जब हम सतही जल के आंकड़ों पर अत्यधिक भरोसा करते हैं और भूमिगत जल को नज़रअंदाज़ कर देते हैं। राजस्थान के 80 % कृषि उत्पादन और लगभग 90 % ग्रामीण पेयजल भूजल से आता है। राज्य के तीन सौ प्रशासनिक ब्लॉकों में से दो सौ से अधिक को ‘अति‑दोहन’ या ‘गंभीर’ कहा जाता है। इन ब्लॉकों में हर साल निकाला गया जल उस जल से बहुत अधिक है जो वापस आता है। हम जलाशयों के स्तर को देखते हैं क्योंकि वे सार्वजनिक रूप से देखे और फ़ोटोग्राफ़ किए जा सकते हैं। लेकिन थार और मारवाड़ की गहरी बंद‑आक्विफ़र, जो एक छिपा हुआ बैंक खाता है, लगातार ख़ाली हो रही है। जब ट्यूबवेल जो पहले 80 फ़ीट पर जल देते थे, 400 फ़ीट से गहरे खोदे जाते हैं और खारा‑फ़्लोराइड‑समृद्ध जल देते हैं, तो संकट अब अस्थायी सूखा नहीं रह जाता; यह एक स्थायी संसाधन बर्बादी बन जाता है

यह जल की कमी चुपचाप राजस्थान की अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुँचा रही है। जीरा, सरसों और इस्पात जैसी फसलें लाभ देती हैं। उनका विकास मुफ्त फ्लैट‑रेट बिजली पर निर्भर करता है जो बड़े सब‑मर्सिबल पंपों को पूरे दिन चलाती है। ये पंप भूजल निकालते हैं। इससे एक चक्र बनता है: किसान असमान वर्षा की भरपाई के लिए अधिक जल पंप करते हैं, जल स्तर और घटता है, उन्हें मोटर की जरूरत पड़ती है, जिससे बिजली कंपनी का खर्च बढ़ता है। लोगों को जल बचाने में मदद करने के बजाय मौजूदा सब्सिडी प्रणाली वास्तव में राजस्थान के गहरे भूजल भंडार को ख़ाली कर रही है

कमजोर ट्रांसफ़र मार्ग समस्या को और बढ़ाते हैं। इंदिरा गांधी नहर परियोजना जैसी नहरें मध्य‑सदी में तब बनाई गई थीं जब हिमनद पिघल रहे थे और वाष्पीकरण कम था। आज सिल्ट जमा हो रहा है, रिसाव ठीक नहीं हो रहे और बिना मापे जल छोड़ा जा रहा है। इससे अंतिम नहरें हफ्तों तक सूखी रहती हैं जब किसान फसलें बोते हैं। जब अंततः जल आता है, तो बाढ़‑सिंचाई में जल बहुत सारा वाष्पीकरण के कारण मिट्टी तक नहीं पहुँच पाता और साथ ही जल निकासी खराब होने से मिट्टी में नमक की मात्रा बढ़ जाती है, जिससे पुनःभरण योग्य भूजल घटता है

इसे सुधारने के लिए बड़े आधिकारिक बयानों या बाहरी ठेकेदारों द्वारा कंक्रीट लाइनिंग पर भारी खर्च की जरूरत नहीं है। राजस्थान को जल को बजट‑बद्ध, ट्रैक‑की गई संपत्ति की तरह मानना चाहिए। हमें हर उपयोग‑ब्लॉक में डिजिटल रीयल‑टाइम सेंसर लगाने चाहिए। ये सेंसर ग्राम पंचायत स्तर तक स्थानीय स्तर पर निकाले गए भूजल की मात्रा दिखाएंगे। यदि कोई गाँव या कारखाना अपना जल नुकसान बिजली बिल की तरह स्पष्ट देखेगा, तो समुदाय स्वयं जल प्रबंधन की मांग करेगा

राज्य को किसानों को प्रोत्साहन बदलना चाहिए। मुफ्त बिजली देकर किसानों को अधिक पंपिंग करवाने की बजाय, जो किसान बाढ़‑सिंचाई से सौर‑ऊर्जा‑संचालित ड्रिप इरिगेशन पर स्विच करें और मिट्टी नमी मॉनिटर करने के लिए सेंसर लगाएँ, उन्हें सीधे नकद और न्यूनतम गारंटीकृत कीमतें दी जानी चाहिए। सूखे क्षेत्रों में एक हजार घन मीटर भूजल बचाना खारा जल उपचार या कई किलोमीटर दूर नहर से जल लाने से बहुत सस्ता है

राजस्थान के पूर्वज जानते थे कि जल को मापना, संग्रहीत करना और बचाना ही जीवन है। उन्होंने सदियों तक जीवित रहे क्योंकि प्रत्येक मानसून की बूंद को कुंड, टैंक और छायादार तालाबों में सावधानी से रखा जाता था। पाइपलाइन की ओर बढ़ते‑बढ़ते हमने इस सावधानी को बड़े पंपों और अल्पकालिक नहर प्रवाह के भ्रम से बदल दिया

यदि राजस्थान एक निर्माण गलियारा बनना चाहता है, अपने खेतों को स्वस्थ रखे और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करे, तो नीति‑निर्माताओं को सतही औसतों को छोड़कर नीचे की जमीन के कठोर आंकड़ों का सामना करना होगा

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संक्षेप में

राष्ट्रीय अभ्यास 'वज्र-सैट' का बेंगलुरु में समापन, यह मवेशियों में खुरपका और मुंहपका रोग के लिए भारत की तैयारियों को मजबूत करता है

राजस्थान सरकार ने अनुदानित यूरिया-डीएपी के गैर‑कृषि उपयोग पर सख्त कार्रवाई की घोषणा

टाइम्स ऑफ़ राजस्थान · मुख्य पृष्ठशनिवार, 7 नवंबर 2026 · पृष्ठ 1

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Rajasthan Ri Baat

A proverb, a word and a district from the land of dunes — every day

PROVERB OF THE DAY

“पाणी पीजे छाण कर, गुरु कीजे जाण कर”

Strain water before you drink it; know a teacher before you follow one.

MARWARI WORD

मनवार

Lovingly insisting a guest eats and drinks a little more

DISTRICT OF THE DAY

Chittorgarh

  • Chittorgarh Fort
  • Vijay Stambh
  • Meera Bai

FAIRS & FESTIVALS

This month: Pushkar Fair, Bundi Utsav

Kumbhalgarh Festival

Rajsamand · December

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