डूंगरपुर जिले की पुलिस ने नकली नोट छापने वाले एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए मास्टरमाइंड समेत चार शातिर आरोपियों को गिरफ्तार किया। पुलिस को मुख्य आरोपी को दबोचने के लिए पंजाब तक करीब 1,300 किलोमीटर तक लगातार पीछा करना पड़ा।

अभियुक्तों को वेब सीरीज से आइडिया मिला था, जिसके बाद सोशल मीडिया से सीखकर नकली नोट बनाना शुरू किया था। पुलिस अधीक्षक मनीष कुमार ने बताया कि 29 सितंबर को रामसागड़ा पुलिस की ओर से माड़ा स्कूल मैदान में नकली नोटों के साथ दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, पर मास्टरमाइंड रवि कुमार मिश्रा फरार था।

गिरोह की रचना और गिरफ्तारी की प्रक्रिया

पुलिस ने तीन दिनों तक 1,300 किलोमीटर तक पीछा करते हुए लुधियाना पंजाब रेलवे स्टेशन पर कादीपुरा प्रतापगढ़ निवासी रवि उर्फ आशिष पुत्र अशोक कुमार मिश्रा को गिरफ्तार किया।

इसके अलावा, पुलिस ने चकफमता उत्तरप्रदेश निवासी मोहम्मद आरिफ पुत्र आस मोहम्मद, अंबाला हरियाणा निवासी आनंद उर्फ पुष्कर पुत्र मोहनलाल कोली और कंडरापारा छत्तीसगढ़ निवासी तरुण पुत्र मनहरण मालेकर को भी गिरफ्तार किया।

जप्त की गई वस्तुओं में कागज, नोट गिनने की मशीन, नोट छापने का प्रिंटर, पाँच सौ रुपए के जाली नोट, लेमिनेशन मशीन, लैपटॉप, नौ मोबाइल फोन और नोट छापने के बाद की रद्दी शामिल हैं।

गिरोह के प्रारम्भिक चरण

डूंगरपुर एसपी मनीष कुमार ने बताया कि आरोपी रवि मिश्रा से पूछताछ में बताया गया कि उसकी दोस्ती पूर्व में डूंगरपुर विजयंगज कॉलोनी निवासी भावेश खटीक और नालंदा बैंग्लोज निवासी नयन जोशी से सोशल मीडिया पर हुई थी। टेलीग्राम पर रवि मिश्रा से बातचीत शुरू हुई, और नयन ने रवि को नकली नोटों का पार्सल भेजा।

पार्सल मिलने के बाद रवि ने नयन से फिर संपर्क किया और अधिक संख्या में नकली नोट छापने व डूंगरपुर आकर काम करने के लिए कहा। दोनों आरोपियों ने रवि से नकली नोट बनाने के लिए आवश्यक उपकरणों की जानकारी ली। लगभग पाँच लाख रुपए के नकली नोट छापे गए, और रवि ने वसुंधरा विहार में एक मकान किराए पर लेकर उपकरण उपलब्ध करवाए।