बूंदी के राजकीय महाविद्यालय ने 6 नवंबर को ‘मिशन लाइफ’ के तहत ई‑कचरा प्रबंधन पर ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित किया। कार्यक्रम में राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी अशोक कुमार जेलिया और महाविद्यालय के प्राचार्य राहुल सक्सेना ने भाग लिया।
जेलिया ने ई‑कचरे से उत्पन्न पर्यावरणीय व स्वास्थ्य समस्याओं पर प्रकाश डाला और वैज्ञानिक व सुरक्षित निस्तारण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ई‑कचरे के उचित प्रबंधन, पुनः उपयोग व पुनर्चक्रण के लिए सामूहिक सहभागिता आज समय की मांग है।
महाविद्यालय का आह्वान
प्राचार्य सक्सेना ने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का विवेकपूर्ण उपयोग करें, पुराने उपकरणों की मरम्मत कराकर उन्हें दोबारा काम में लें और ई‑कचरे को केवल अधिकृत संग्रहण केंद्रों तक ही पहुँचाएँ। उन्होंने दीपावली की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि छोटे‑छोटे व्यक्तिगत प्रयास बड़े पर्यावरणीय बदलाव का आधार बन सकते हैं।
विशेषज्ञों की राय
वनस्पति शास्त्र के आचार्य डॉ. दिलीप कुमार राठौड़ ने ई‑कचरे में सीसा, पारा और कैडमियम जैसी विषैली धातुओं के बारे में चेतावनी दी। उन्होंने बूंदी जिले में ‘जिला स्तरीय ई‑कचरा संग्रहण केंद्र’ स्थापित करने की आवश्यकता पर जोर दिया और ‘रिड्यूस, रीयूज और रीसायकल’ के सिद्धांत को अपनाने की अपील की।
कार्यक्रम प्रभारी डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ई‑कचरे को कम करने को भावी पीढ़ियों के लिए एक अहम कदम बताया। वर्चुअल रूप से आयोजित इस कार्यक्रम में महाविद्यालय के 40 से अधिक संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों और आम नागरिकों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का सफल संचालन डॉ. राठौड़ ने किया।

