बारां जिले के डी-मार्ट स्टोर में सहरिया महिलाओं द्वारा तैयार वनोपज आधारित उत्पादों की बिक्री शुरू हुई, जिससे आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई।

मिशन सामर्थ्य-सक्षम सखी के तहत, सहरिया जनजाति की महिलाओं द्वारा तैयार धनिया, मिर्च, हल्दी, मसाले, अचार, आंवला कैंडी, चिरौंजी और शहद जैसे उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर के बाजार में पहचान मिली है।

पहल के प्रमुख पहलू

यह पहल जिला कलेक्टर बालमुकुंद असावा के निर्देशन में जनजाति विभाग, केवीके अंता और राजीविका के संयुक्त प्रयास से चल रही है। खुशालपुरा में चिरौंजी प्रसंस्करण इकाई, केवीके में शहद प्रसंस्करण इकाई और जिला मुख्यालय पर ग्राम श्री मार्ट की स्थापना से उत्पादों की ब्रांडिंग और पैकेजिंग की जा रही है।

  • कुल बिक्री लगभग 77 लाख रुपये
  • 80 वन धन विकास केंद्र सक्रिय
  • प्रति माह 72 लाख रुपये की स्थायी बाजार मांग

भविष्य की योजनाएँ

आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 में बिक्री को 2 करोड़ रुपये तक ले जाने का लक्ष्य है, जिसके लिए 1 करोड़ रुपये की अतिरिक्त मशीनरी, 217 स्वयं सहायता समूहों के लिए 10 करोड़ रुपये का रियायती ऋण और 957 महिलाओं को लखपति दीदी बनाने के लिए 8 करोड़ रुपये की सहायता की व्यवस्था की जाएगी।