सामाजिक न्याय मंत्रालय की अपर सचिव सुश्री मोना के. खंडार ने उत्तराखंड के रायवाला में स्थित सरकारी नशा मुक्ति केंद्र का दौरा किया।

केंद्र चिकित्सा देखभाल, पेशेवर परामर्श, संरचित दिनचर्या और स्वास्थ्य सम्बंधी गतिविधियों को मिलाकर नशा मुक्ति के लिए एक समग्र, गरिमा‑केंद्रित दृष्टिकोण अपनाता है।

पुनर्वास कार्यक्रम का अवलोकन

केंद्र में योग, योग निद्रा, एक्यूप्रेशर, मसाज, मड थेरेपी और एप्सम सॉल्ट थेरेपी जैसी स्वास्थ्यवर्धक गतिविधियाँ चलती हैं, जो पेशेवर उपचार और परामर्श के साथ मिलकर निवासियों की पुनर्प्राप्ति में सहायक हैं।

एसपीवाईएम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इन गतिविधियों से निवासियों को तनाव से निपटने, स्वस्थ दिनचर्या बनाए रखने और समग्र रूप से बेहतर महसूस करने में मदद मिलती है।

अपर सचिव का प्रस्ताव

सुश्री खंडार ने आयुष मंत्रालय के साथ मिलकर योग और प्राकृतिक चिकित्सा को नशा मुक्ति कार्यक्रमों में एकीकृत करने की संभावनाओं पर चर्चा की।

उन्होंने कहा कि रायवाला केंद्र का अनुभव पायलट परियोजनाओं के लिए प्रारंभिक बिंदु हो सकता है, जिसमें साक्ष्य‑आधारित चिकित्सा उपचार और पेशेवर परामर्श के साथ पारंपरिक पद्धतियों का संयोजन हो।

प्रस्तावित परियोजनाओं के लिए व्यवस्थित योजना, दस्तावेज़ीकरण और मूल्यांकन की आवश्यकता होगी, ताकि सुरक्षा, स्वीकार्यता और लाभों का आकलन किया जा सके।

भविष्य की दिशा

सफल प्रथाओं को देश भर के सरकारी नशा मुक्ति केंद्रों में अपनाने पर विचार किया जा सकता है, बशर्ते कि संबंधित मंत्रालयों की मंजूरी मिल जाए।

अपर सचिव ने कहा कि यह सहयोग सामान्य दिशा‑निर्देश, कर्मचारियों का प्रशिक्षण और गुणवत्ता मानकों को विकसित करने में योगदान दे सकता है।