स्माइल (SMILE) योजना के तहत 46 वर्षीय मीरा ठाकुर को पुनर्वास, चिकित्सा और कौशल प्रशिक्षण मिला, जिससे वह बेघर जीवन से आजीविका कमाने वाली स्वावलंबी महिला बनीं।
मीरा, जो पहले कक्षा ग्यारहवीं उत्तीर्ण कर फूलों की माला बनाती थीं, परिवारिक गतिरोध के बाद गंभीर आर्थिक और स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रही थीं।
16 मार्च 2024 को परम पूज्य रक्षक आदिनाथ वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसायटी (PRAWES) ने इंदौर के शनि मंदिर परिसर से उन्हें रेस्क्यू किया और पुनर्वास केंद्र से जोड़ दिया।
पुनर्वास और चिकित्सा सहायता
उन्हें अरबिंदो अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ गंभीर एनीमिया का उपचार और दोनों आँखों का मोतियाबिंद ऑपरेशन कराया गया।
स्माइल योजना के अंतर्गत सुरक्षित आवास, चिकित्सीय उपचार, मनोवैज्ञानिक परामर्श और निरंतर पुनर्वास सहायता प्रदान की गई।
कौशल विकास और आजीविका
मीरा ने योग, ध्यान, संगीत चिकित्सा के साथ-साथ पुरानी साड़ियों से कालीन, डोरमैट, सिलाई, मोती की माला, अगरबत्ती और गोबर से बनी मूर्तियाँ बनाना सीखा।
जुलाई 2025 में राष्ट्रीय सामाजिक रक्षा संस्थान (NISD) द्वारा आयोजित कार्यशाला में भाग लेकर कौशल विकास को और मजबूत किया।
सामुदायिक योगदान और भविष्य की योजनाएँ
वह पुनर्वास केंद्र में रसोई संचालन की जिम्मेदारी संभालती हैं और 50-60 लाभार्थियों के लिए नाश्ता तैयार करती हैं।
हस्तशिल्प उत्पादों को मेलों, बाजारों और प्रदर्शनियों में बेचकर लगभग ₹8,000 प्रति माह कमाती हैं, जो पहले की 200 रुपये की भीख से कहीं अधिक है।
भविष्य में अन्य पुनर्वासित महिलाओं के साथ अपने घर में रहने और अपने अनुभवों से दूसरों की मदद करने की इच्छा रखती हैं।
