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Times of Rajasthan e-paper — 30 October 2026

Rajasthan edition · 8 pages

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जयपुर
राजस्थान संस्करण
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पृष्ठ 1

राजस्थान

मुख्यमंत्री का राज्य सेवाओं के प्रशिक्षु अधिकारियों से संवाद

हर व्यक्ति की समस्या का करें समाधान, जन सुनवाई को बनाएं प्रभावी माध्यम अधिकारी जनसेवा के उत्तरदायित्व को पूर्ण जिम्मेदारी से निभाएं राजस्थान का युवा ऊर्जावान और प्रतिभाशाली, इनकी क्षमताओं के विकास के लिए निरंतर कार्य जारी आमजन का विश्वास अर्जित करना ही प्रशासनिक सफलता का वास्तविक पैमाना मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा विभिन्न राज्य सेवाओं के प्रशिक्षु अधिकारियों ने मुख्यमंत्री से साझा किए अनुभव लगातार आरएएस भर्ती परीक्षा के आयोजन के लिए मुख्यमंत्री का जताया आभार, एक ही वर्ष में 2 बैच के प्रशिक्षण को बताया सराहनीय

जयपुर, 29 अक्टूबर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रशासनिक सेवा में वास्तविक सफलता आम नागरिक के जीवन में आए सकारात्मक बदलाव से तय होती है। हमेशा आमजन की जरूरतों और समस्याओं को ध्यान में रखकर प्रशासन द्वारा प्रत्येक निर्णय लिया जाना चाहिए। अधिकारी अपने पद को अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि जनसेवा के उत्तरदायित्व के रूप में समझें। उन्होंने कहा कि वे अपने संघर्ष और अतीत को याद रखें एवं इससे प्रेरणा लेकर आमजन के हित में कार्य करें तथा अपने उद्देश्य की दिशा कभी न बदलें, क्योंकि जीवन की असली परीक्षा तो जिम्मेदारी के पद पर बैठने के बाद शुरू होगी।

मुख्यमंत्री गुरुवार को एचसीएम रीपा (ओटीएस) के बी एस मेहता सभागार में राज्य सेवाओं के प्रशिक्षु अधिकारियों से संवाद कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि युवाओं के सपने और भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए हर वर्ष आरएएस भर्ती परीक्षा आयोजित होगी। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु अधिकारी हर व्यक्ति और पूरे राजस्थान को अपना परिवार समझें तथा पूर्ण संवेदना के साथ आमजन से जुड़कर उनकी समस्या का समाधान करें।

जनविश्वास को बनाएं प्रशासन की सबसे बड़ी पूंजी-

मुख्यमंत्री ने कहा कि कार्यालय में आने वाला प्रत्येक व्यक्ति किसी न किसी उम्मीद के साथ आता है। ऐसे में अधिकारियों का व्यवहार, कार्यशैली और निर्णय उस व्यक्ति का प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि लोकसेवा में अधिकारी की सबसे बड़ी पूंजी चरित्र और जनता का विश्वास होता है। इसलिए ईमानदारी और निष्पक्षता को अपने कार्य का आधार बनाएं। उन्होंने अधिकारियों से अपील करते हुए कहा कि वे ऐसी कार्यसंस्कृति विकसित करें, जिसमें लोगों को अपने काम के लिए अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ें और प्रत्येक व्यक्ति की बात सम्मानपूर्वक सुनी जाए।

उन्होंने कहा कि अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र में जाकर लोगों से मिलें, उनकी समस्याएं सुनें और स्थानीय परिस्थितियों को समझें। जनसुनवाई को केवल औपचारिक गतिविधि तक सीमित न रखते हुए समस्याओं के समाधान का प्रभावी माध्यम बनाया जाए।

योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्ति तक पहुंचाना हो प्राथमिकता-

मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतियां और योजनाएं तभी सार्थक होती हैं, जब उनका लाभ पात्र व्यक्ति तक समय पर पहुंचे और उसके जीवन में वास्तविक सुधार दिखाई दे। इसके लिए अधिकारियों को योजनाओं की पात्रता, प्रक्रियाओं और समयसीमा की स्पष्ट जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कार्यक्षेत्र में महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं निर्धारित करने, स्पष्ट लक्ष्य तय करने तथा नियमित रूप से उनकी प्रगति की समीक्षा करने पर बल दिया।

प्रशासन को प्रभावी बनाने में तकनीक का करें उपयोग-

मुख्यमंत्री ने कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन सेवाएं, डेटा और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) शासन एवं प्रशासन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के नए अवसर प्रदान कर रहे हैं। युवा अधिकारी अपनी तकनीकी समझ का उपयोग प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल बनाने, समय की बचत करने और सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने में करें। उन्होंने कहा कि डिजिटल सेवाओं का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुंचाना जरूरी है। यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि केवल तकनीक का उपयोग नहीं कर पाने के कारण कोई व्यक्ति सरकारी सेवा के लाभ से वंचित न रह जाए।

युवाओं को अवसर और आत्मनिर्भरता प्रदान करना सरकार की प्राथमिकता-

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान का युवा ऊर्जा, प्रतिभा और आकांक्षाओं से भरा हुआ है। उसे अच्छी शिक्षा, कौशल विकास, रोजगार के अवसर और उद्यमिता के लिए अनुकूल वातावरण चाहिए। राज्य सरकार युवाओं की क्षमताओं को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी दिशा में राज्य में 1 लाख 93 हजार पदों पर नियुक्तियां दी गई हैं, जबकि 1 लाख 18 हजार पदों पर भर्तियां प्रक्रियाधीन है। वहीं, वर्ष 2026 में सवा लाख पदों के लिए भर्ती कैलेंडर जारी किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने निजी क्षेत्र में भी युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध करवाए हैं।

विकसित राजस्थान-2047 के संकल्प की सिद्धि में निभाएं सक्रिय भूमिका-

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का संकल्प रखा है। इसी राष्ट्रीय संकल्प के अनुरूप राज्य सरकार ने विकसित राजस्थान-2047 का लक्ष्य निर्धारित किया है। राजस्थान में ऊर्जा, पर्यटन, कृषि, खनन, उद्योग, हस्तशिल्प, शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल सेवाओं सहित अनेक क्षेत्रों में विकास की व्यापक संभावनाएं हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार कृषि एवं कृषि आधारित उद्योगों को आधुनिक तकनीक और बेहतर बाजारों से जोड़ने, ऐतिहासिक धरोहर एवं समृद्ध लोकसंस्कृति के अनुरूप पर्यटन को बढ़ावा देने तथा उद्योगों के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की दिशा में कार्य कर रही है। इसके साथ ही शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल विकास और सामाजिक सुरक्षा की सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना भी आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इन लक्ष्यों की प्राप्ति में प्रशिक्षु अधिकारियों की भूमिका महत्वपूर्ण है। इस दिशा में नीतियों को धरातल पर लागू करने, विकास परियोजनाओं के क्रियान्वयन और स्थानीय समस्याओं के समाधान में उन्हें सक्रिय भूमिका निभानी होगी। साथ ही, उन्हें विकसित राजस्थान-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए दूरदृष्टि के साथ प्रभावी क्रियान्वयन की क्षमता भी विकसित करनी होगी।

अच्छे विचारों को व्यवहार में बदलें-

मुख्यमंत्री ने प्रशिक्षु अधिकारियों से कहा कि प्रशासन में ईमानदारी, संवेदनशीलता और निष्पक्षता ही जनविश्वास की सबसे मजबूत नींव हैं। वे अच्छे विचारों को व्यवहार में लाकर सभी को साथ लेकर साझा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए कार्य करें। उन्होंने कहा कि अधिकारियों की सबसे बड़ी उपलब्धि वह विश्वास होगा, जो आम नागरिक उनके प्रति व्यक्त करेगा।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने राजस्थान के विकास का रोड मैप बनाया जिसके तहत सबसे पहले जल उपलब्धता के क्षेत्र में महत्वपूर्ण समझौते किए गए। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राजस्थान को 4 जल समझौतों की सौगात मिली, जिसमें रामजल सेतु लिंक परियोजना, यमुना जल समझौता, नर्मदा समझौता और किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना समझौता शामिल है। राज्य सरकार इनसे जुड़े विकास कार्यों को गति प्रदान कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में देवास, माही और ब्राह्मणी जैसी परियोजनाओं पर भी तेजी से काम चल रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान बिजली में आत्मनिर्भर प्रदेश बना है। 27 जिलों के किस

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राजस्थान

"अपनी बीट पुलिस को जानें" QR कोड से मिलेगी पुलिस अधिकारियों की पूरी जानकारी

आमजन और पुलिस के बीच समन्वय होगा और अधिक मजबूत (Know Your Police Beat) QR कोड स्कैन करते ही बीट अधिकारी से लेकर DCP तक के संपर्क विवरण मिलेंगे पुलिस कमिश्नर श्री मित्तल ने किया लोकार्पण, मानसरोवर थाना क्षेत्र से होगी शुरुआत, चरणबद्ध रूप से पूरे जयपुर कमिश्नरेट में लगेंगे वशिष्ट क्यूआर कोड जागरूकता बोर्ड

जयपुर, 29 अक्टूबर। जयपुर पुलिस द्वारा आमजन और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा नागरिकों को अपने क्षेत्र की बीट पुलिस एवं संबंधित पुलिस अधिकारियों की जानकारी सहज रूप से उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से ‘अपनी बीट पुलिस को जानें’ QR Code आधारित बीट जागरूकता बोर्ड लगाए जाएंगे। इस पहल से आमजन को अपने क्षेत्र की पुलिस से सीधे जुड़ने, आवश्यकतानुसार संपर्क करने और पुलिस संबंधी जानकारी प्राप्त करने में सुविधा होगी।

इसी क्रम में गुरुवार को जयपुर पुलिस कमिश्नरेट में ‘अपनी बीट पुलिस को जानें’ (Know Your Police Beat) QR Code आधारित बीट जागरूकता बोर्ड का पुलिस कमिश्नर श्री सचिन मित्तल द्वारा लोकार्पण किया गया। उन्होंने बताया कि प्रत्येक बीट के लिए अलग QR कोड निर्धारित किया गया है तथा उसी बीट के अनुरूप जागरूकता बोर्ड तैयार किए गए हैं। प्रत्येक बीट क्षेत्र में 7 से 10 बोर्ड उपयुक्त स्थानों पर लगाए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक नागरिक इस सुविधा का लाभ उठा सकें। श्री मित्तल ने बताया कि इस पहल की शुरुआत प्रारंभिक चरण में पुलिस थाना मानसरोवर क्षेत्र से की जाएगी। इसके बाद चरणबद्ध रूप से जयपुर पुलिस आयुक्तालय के सभी पुलिस थाना क्षेत्रों में संबंधित बीट के अनुसार जागरूकता बोर्ड लगाए जाएंगे। उन्होंने जानकारी दी कि प्रत्येक बोर्ड पर अंकित विशिष्ट QR कोड को स्कैन करने पर संबंधित बीट का विवरण, पुलिस थाने का पता, गूगल लोकेशन और संपर्क नंबर सहित संबंधित DCP, ADDNL. DCP, ACP, SHO तथा बीट अधिकारी का नाम एवं संपर्क नंबर उपलब्ध हो सकेगा।

इस व्यवस्था की विशेषता यह है कि पुलिस अधिकारियों के स्थानांतरण अथवा पदस्थापन में परिवर्तन होने पर भी QR कोड स्कैन करने पर नवीन पदस्थापित अधिकारी का नाम और संपर्क नंबर प्रदर्शित होगा। इससे नागरिकों को अधिकारियों के अद्यतन संपर्क विवरण प्राप्त करने में आसानी होगी और पुरानी जानकारी के कारण होने वाली असुविधा से बचा जा सकेगा। इस पहल का उद्देश्य पुलिस और आमजन के बीच संवाद को अधिक सरल, सुलभ एवं प्रभावी बनाना तथा पुलिस-जन सहभागिता को मजबूत करना है।

कार्यक्रम में श्री ओमप्रकाश, विशेष पुलिस आयुक्त, डॉ. अजय सिंह, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (कानून एवं व्यवस्था), श्री प्रदीप मोहन शर्मा अतिरिक्त, पुलिस आयुक्त (यातायात एवं प्रशासन), डॉ. रामेश्वर सिंह, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (क्राइम), श्री योगेश गोयल, पुलिस उपायुक्त (क्राइम), श्री राजर्षि राज, पुलिस उपायुक्त (दक्षिण), श्रीमती अनुष्ठा कालिया, पुलिस उपायुक्त मुख्यालय सहित संबंधित अधिकारीगण उपस्थित रहे।

पल्लव/आकाश

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खेल

पंच गौरव के तहत बालिका कबड्डी लीग में झोटवाड़ा का दबदबा बरकरार, चाकसू रही उपविजेता

जयपुर, 29 अक्टूबर। राजस्थान सरकार के पंच गौरव कार्यक्रम के अंतर्गत चौगान स्टेडियम, जयपुर में आयोजित जिला स्तरीय जयपुर बालिका कबड्डी लीग के दूसरे दिन भी रोमांचक मुकाबले देखने को मिले। कक्षा 10वीं से 12वीं तक की छात्राओं ने मैदान पर दमखम, खेल कौशल और टीम भावना का शानदार प्रदर्शन किया।

प्रतियोगिता में झोटवाड़ा टीम ने विजेता तथा चाकसू टीम ने उपविजेता का स्थान हासिल किया। दोनों टीमों को ट्रॉफी एवं मोमेंटो प्रदान कर सम्मानित किया गया। सभी प्रतिभागी खिलाड़ियों को कबड्डी पोशाक तथा फाइनल में पहुंची टीमों को मेट शूज वितरित किए गए। खिलाड़ियों के लिए नाश्ते एवं भोजन की समुचित व्यवस्था भी की गई।

पंच गौरव के तहत आयोजित इस खेल आयोजन का उद्देश्य बालिकाओं को प्रतियोगी खेलों के लिए मंच उपलब्ध कराना, उनकी प्रतिभा को निखारना तथा कबड्डी के प्रति रुचि और सहभागिता बढ़ाना है।

इस अवसर पर बाबूलाल मीना, संयुक्त निदेशक, आर्थिक एवं सांख्यिकी, कलेक्ट्रेट जयपुर, जिला खेल अधिकारी मानसिंह एवं कबड्डी कोच शशि शर्मा सहित संबंधित अधिकारी एवं कार्मिक उपस्थित रहे।

हेमंत/आकाश

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जयपुर

Jaipur News : 40 विला-कॉटेज खरीद विवाद में घिरे वरिष्ठ IAS शिखर अग्रवाल APO, राजस्थान सरकार ने की कार्रवाई

जयपुर। राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी शिखर अग्रवाल को अवेटिंग पोस्टिंग ऑर्डर्स (APO) कर दिया है। संपत्ति खरीद से जुड़े विवाद के बीच राज्य सरकार ने यह कदम उठाया है। कार्मिक विभाग की ओर से 28 अक्टूबर की देर रात जारी आदेश में उन्हें आगामी आदेशों तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखने की बात कही गई है। हालांकि, आदेश में कार्रवाई का कारण प्रशासनिक बताया गया है और संपत्ति विवाद का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है।

क्या है पूरा मामला?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वर्ष 1993 बैच के IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल, उनकी IPS अधिकारी पत्नी प्रशाखा माथुर और परिवार के अन्य सदस्यों द्वारा लगभग ढाई साल की अवधि में एक ही रियल एस्टेट कंपनी से करीब 40 विला और कॉटेज खरीदने का मामला सामने आया है। इन संपत्तियों की कुल कीमत लगभग 6.16 करोड़ रुपये बताई गई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, संपत्तियों में अलवर जिले के अजबगढ़ में 20 विला और उदयपुर जिले के बुझड़ा में 20 कॉटेज शामिल हैं। बताया गया है कि इन संपत्तियों को खरीदने के बाद उसी कंपनी को लीज पर दे दिया गया, जिससे इन्हें खरीदा गया था।

सालाना 1.80 करोड़ रुपये की लीज का दावा

मीडिया रिपोर्टों में संपत्तियों के लीज समझौतों के आधार पर सालाना लगभग 1.80 करोड़ रुपये की किराया आय का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, उदयपुर के कॉटेज के लिए प्रति कॉटेज चार लाख रुपये और अलवर के विला के लिए प्रति विला पांच लाख रुपये सालाना लीज राशि बताई गई है।

इन संपत्तियों की खरीद और अधिकारियों की संपत्ति घोषणा से जुड़े विवरणों को लेकर भी सवाल उठे हैं। हालांकि, इन रिपोर्टों में लगाए गए आरोपों और सामने आए विवरणों की जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

कई महत्वपूर्ण विभागों की संभाल रहे थे जिम्मेदारी

APO किए जाने से पहले शिखर अग्रवाल उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), राजकीय उपक्रम, निवेश संवर्धन और दिल्ली-मुंबई औद्योगिक कॉरिडोर (DMIC) सहित कई महत्वपूर्ण विभागों और संस्थानों से जुड़े पदों पर कार्यरत थे। वे राजस्थान राज्य औद्योगिक विकास एवं निवेश निगम (RIICO) के अध्यक्ष तथा राजस्थान लघु उद्योग निगम (RAJSICO) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। कार्मिक विभाग के आदेश के बाद उन्हें इन महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से हटाकर आगामी पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा गया है।

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भीलवाड़ा

भिलवाड़ में बालिका तस्करी का जाल: माता‑पिता 3‑5 लाख में बेचते, मुंबई में रेट 35‑40 लाख

भिलवाड़ (राजस्थान) – एक महीने की जांच में पता चला कि कई गरीब परिवार अपनी बेटियों को 3‑5 लाख रुपये में बेच रहे हैं, जिन्हें गोदनामे बनाकर मुंबई, पुणे और नागपुर तक ले जाया जाता है, जहाँ उनका रेट 35‑40 लाख रुपये तक पहुँचता है।

भास्कर टीम ने राजस्थान‑मध्यप्रदेश सीमा के 16 जिलों के 100 से अधिक बस्तियों में इस तस्करी नेटवर्क की जाँच की। टीम ने परिवारों, स्कूल रिकॉर्ड, FIR और रेस्क्यू दस्तावेजों को मिलाकर पुष्टि की कि कई बच्चे ‘गोदनामे’ पर हस्ताक्षर कर विभिन्न शहरों में पहुँचाए जा रहे हैं।

बच्चियों की बिक्री के दो मुख्य तरीके

पहला तरीका – कर्ज के कारण माता‑पिता सीधे बेटी को दलाल को 2‑5 लाख रुपये में बेचते हैं। उदाहरण के तौर पर बूंदी के एक गांव में एक पिता ने बताया कि उसने अपनी दो बेटियों को रिश्तेदारी में ही दे दिया, जबकि एक अन्य परिवार ने तीन बेटियों को 50‑50 हजार रुपये में बेच दिया।

दूसरा तरीका – गोदनामे (स्टांप) पर लिखवाकर बच्ची को ‘दत्तक’ के रूप में दिखाया जाता है, फिर बड़े शहरों में लाखों रुपये में सौदा किया जाता है। झालावाड़ की दो बस्तियों में यह प्रक्रिया स्पष्ट रूप से देखी गई, जहाँ बच्चियों को रिश्तेदारों के पास रख कर बाद में बेच दिया जाता था।

मुंबई में तस्करी का स्वरूप

मुंबई के अंधेरी, परेल, बांद्रा और सेंट्रल मुंबई के बारों में दलालों ने 8‑साल के एग्रीमेंट के तहत लड़कियों को काम दिलाने का वादा किया। दलाल रविकिशन ने बताया कि शुरुआती रेट 25‑30 लाख रुपये है, जबकि वास्तविक रेट 35‑40 लाख रुपये तक पहुँचता है।

रिपोर्ट के अनुसार, 15‑17 साल की दो लड़कियों और 20 साल की तीन लड़कियों को इस नेटवर्क में फँसाया गया। दस्तावेज़ बनाकर नाम‑पते बदल दिए जाते हैं, जिससे पहचान छुपी रहती है।

पुलिस की कार्रवाई और बचाव

मुंबई के नैरूल पुलिस थाने में जांच के दौरान तीन लड़कियों को एग्रीमेंट पर बेचा पाया गया, जो अब देवनार बालिका गृह में रखी हैं। पुलिस ने बताया कि पिछले पाँच वर्षों में राजस्थान, मध्यप्रदेश सहित 34 नाबालिग लड़कियों को निरुद्ध किया गया है।

भिलवाड़, झालावाड़, बूंदी, चित्तौड़गढ़, कोटा, प्रतापगढ़, राजसमंद सहित 16 जिलों में यह जाल मौजूद है। मां‑बाप द्वारा 3‑5 लाख रुपये में बेटी बेचने की रिपोर्ट मिली। गोदनामे बनाकर बच्चियों को बड़े शहरों में 35‑40 लाख रुपये में बेचा जाता है। मुंबई में 8‑साल के एग्रीमेंट के तहत काम दिलाने का झूठा वादा किया जाता है।

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बिज़नेस

राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम की 93वीं महापरिषद बैठक नई दिल्ली में

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अध्यक्षता में राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) की 93वीं महापरिषद बैठक आज नई दिल्ली स्थित निगम के मुख्यालय में आयोजित की।

बैठक में NCDC की वित्तीय और संस्थागत उपलब्धियों, सहकारी क्षेत्र में वित्तपोषण के विस्तार, नई बहुराज्यीय सहकारी संस्थाओं के विकास, ग्रामीण आजीविका के सुदृढ़ीकरण और निगम की भावी कार्ययोजना पर विचार-विमर्श हुआ।

पिछले पाँच वर्षों की उपलब्धियाँ

अमित शाह ने पिछले पाँच वर्षों में NCDC की उल्लेखनीय प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस अवधि को निगम के लिए “स्वर्णिम काल” कहा जा सकता है।

स्रोत के अनुसार, सहकारी मंत्रालय के गठन के बाद से NCDC ने ₹4.14 लाख करोड़ से अधिक की वित्तीय सहायता वितरित की है। वित्त वर्ष 2025‑26 में निगम ने ₹1.27 लाख करोड़ से अधिक का संवितरण किया और शुद्ध लाभ ₹1,475 करोड़ अर्जित किया।

भविष्य की दिशा

अमित शाह ने NCDC के अगले 25 वर्षों के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सहकारी क्षेत्र के अनुभवी प्रतिनिधियों और पेशेवर विशेषज्ञों का एक समूह गठित किया जाना चाहिए।

साथ ही, उन्होंने सहकारी क्षेत्र में प्रशासन को पेशेवर बनाना और सहकारी सिद्धांतों पर आधारित रखना आवश्यक बताया।

पूर्वोत्तर पर विशेष ध्यान

बैठक में पूर्वोत्तर को दूध, अंडा, मछली और मांस उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सहकारी क्षेत्र के माध्यम से विशेष परियोजनाएँ तैयार करने पर बल दिया गया।

अमित शाह ने निर्देश दिया कि NCDC के पूर्वोत्तर स्थित कार्यालय इन चार क्षेत्रों पर केंद्रित व्यावहारिक परियोजनाएँ तैयार करें और आवश्यक वित्तपोषण उपलब्ध कराएँ।

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संक्षेप में

सामाजिक न्याय मंत्रालय की अपर सचिव ने रायवाला नशा मुक्ति केंद्र का दौरा किया

डॉ. जितेंद्र सिंह के प्रौद्योगिकी के माध्यम से परिवर्तन के आह्वान के साथ 'ईएसटीआईसी 2026' संपन्न हुआ

श्रीगंगानगर में जिला निर्वाचन अधिकारी व पुलिस अधीक्षक ने स्ट्रांग रूम व मतदान केंद्रों का निरीक्षण

जांच में अनियमिताएं पर 10000 रुपये का जुर्माना

सीमावर्ती क्षेत्रों के मतदान केंद्रों का किया निरीक्षण

चूरू में 17-19 वर्ष के युवाओं के लिए 04 नवंबर तक विशेष मतदाता पंजीकरण अभियान

टाइम्स ऑफ़ राजस्थान · मुख्य पृष्ठशुक्रवार, 30 अक्टूबर 2026 · पृष्ठ 1

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Rajasthan Ri Baat

A proverb, a word and a district from the land of dunes — every day

PROVERB OF THE DAY

“पाणी पीजे छाण कर, गुरु कीजे जाण कर”

Strain water before you drink it; know a teacher before you follow one.

MARWARI WORD

मनवार

Lovingly insisting a guest eats and drinks a little more

DISTRICT OF THE DAY

Chittorgarh

  • Chittorgarh Fort
  • Vijay Stambh
  • Meera Bai

FAIRS & FESTIVALS

This month: Pushkar Fair, Bundi Utsav

Kumbhalgarh Festival

Rajsamand · December

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