- राष्ट्रीय औसत को 10 प्रतिशत पीछे छोड़ प्रदेश में महिलाओं की भागीदारी 72.69 प्रतिशत पहुंची
- राजस्थान में औसतन मिल रहा 4.27 दिन का अधिक रोजगार
- 15 दिन में ही 97 प्रतिशत से अधिक को हो रहे भुगतान जनरेट
- 18.86 लाख परिवारों और 21.66 लाख व्यक्तियों को रोजगार
जयपुर , 29 अक्टूबर। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन , आजीविका संवर्धन और आधारभूत सुविधाओं के विकास को प्राथमिकता देते हुए निरंतर कार्य कर रही है। विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) योजना के सफल क्रियान्वयन से महिलाओं , वंचितों को अधिक से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं , जिससे उनका आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण सुनिश्चित हो रहा है।
प्रधानमंत्री के विश्वास के अनुरूप ग्रामीण भारत के भविष्य को नई दिशा दे रही वीबी जी राम जी योजना - मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ग्रामीण भारत के भविष्य को नई दिशा देने वाली वीबी जी राम जी की पहल की है। प्रधानमंत्री का स्पष्ट मत है कि गांवों को विकसित बनाकर ही भारत को विकसित बनाया जा सकता है। किसान की समृद्धि , श्रमिक के सम्मान और गांव की आत्मनिर्भरता से भारत विश्व की अग्रणी शक्ति बनेगा। यह योजना ग्रामीण रोजगार की मजबूत गारंटी और विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बन रही है। इस योजना से रोजगार के साथ-साथ जल संरक्षण , आधारभूत संरचना और ग्राम विकास के नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। इसमें सालाना रोजगार की कानूनी गारंटी को 100 दिन से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है।
इस वर्ष ( 2026-27) योजना के अंतर्गत अब तक राजस्थान में महिलाओं की रोजगार में भागीदारी राष्ट्रीय औसत से 10.44 प्रतिशत अंक अधिक रही है। राज्य में कुल रोजगार दिवसों में महिलाओं की हिस्सेदारी 72.69 प्रतिशत दर्ज की गई , जबकि राष्ट्रीय औसत 62.25 प्रतिशत है। यह ग्रामीण महिलाओं की आजीविका के अवसरों में उनकी सक्रिय भूमिका को दर्शाता है।
प्रति परिवार औसतन 24.29 दिन का रोजगार
राजस्थान में योजना के तहत अब तक 18.86 लाख परिवारों और 21.66 लाख व्यक्तियों ने रोजगार प्राप्त किया है। राज्य में प्रति परिवार औसतन 24.29 दिन का रोजगार प्राप्त कर चुके हैं , जबकि राष्ट्रीय औसत 20.02 दिन है। इस तरह राजस्थान में औसतन 4.27 दिन अधिक रोजगार उपलब्ध कराया जा रहा है।
42 हजार 557 परिसंपत्तियों का निर्माण , मिशन जल संरक्षण ब्लॉक पर 73 प्रतिशत से अधिक खर्च
योजना के तहत राजस्थान में 42 हजार 557 परिसंपत्तियों का निर्माण हो चुका है। इन कार्यों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास गतिविधियों को नई गति प्रदान की जा रही है। कृषि एवं इससे संबद्ध गतिविधियों पर कुल व्यय का 35.88 प्रतिशत और मिशन जल संरक्षण ब्लॉक पर 73.17 प्रतिशत खर्च किया जा रहा है। इस प्रकार गांव-ढाणी में जल जैसी बुनियादी सुविधा पर केन्द्रित होकर कार्य किया जा रहा है।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति की लगभग 44 प्रतिशत सक्रियता
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को समावेशी बनाते हुए इस योजना के तहत वंचित वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। प्रदेश में अनुसूचित जाति के 20.43 और अनुसूचित जनजाति वर्ग की 23.34 प्रतिशत सहित कुल 44 प्रतिशत सक्रिय हिस्सेदारी से यह योजना अन्त्योदय के संकल्प को धरातल पर साकार कर रही है। वहीं , राष्ट्रीय स्तर पर इनकी हिस्सेदारी क्रमशः 18 प्रतिशत और 18 प्रतिशत दर्ज की गई है। इस प्रकार दोनों वर्गों की उत्साहजनक भागीदारी में राजस्थान राष्ट्रीय औसत से आगे है।
ईएफएमएस के माध्यम से 100 प्रतिशत खर्च
योजना के तहत राजस्थान में 97.04 प्रतिशत भुगतान 15 दिनों के भीतर जनरेट किए गए , जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 82.46 प्रतिशत है। इस प्रकार राजस्थान राष्ट्रीय औसत से 14.58 प्रतिशत अंक आगे है। राज्य में कुल व्यय का 100 प्रतिशत इलेक्ट्रॉनिक फंड मैनेजमेंट सिस्टम (मथ्डै) के माध्यम से किया गया है , जबकि राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 99.97 प्रतिशत है।
