सुधांश पंत, केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सचिव, ने 1 नवंबर को जयपुर में विद्या भवन सोसायटी द्वारा आयोजित सीड‑2 सम्मेलन के उद्घाटन में कहा कि हर विद्यालय को सतत विकास लक्ष्य की तरह ही अपना विकास लक्ष्य तय करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि स्कूलों को बदलते विश्व के अनुरूप ज्ञान, मूल्य और प्रायोगिक कौशल उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसके अंतर्गत ऊर्जा खपत, जल खपत, जल बचत और कचरा उत्सर्जन में कमी का वार्षिक आकलन शामिल होना चाहिए।
सम्मेलन की रूपरेखा और प्रायोजक
सम्मेलन की रूपरेखा हर्थ एडवाइजर्स द्वारा तैयार की गई है। प्रायोजक जेएसडब्ल्यू एनर्जी और वीवा फाउंडेशन हैं।
अन्य प्रमुख वक्ता
पूर्व केन्द्रीय शिक्षा सचिव संजय कुमार ने भी मुख्य वक्ता के रूप में भाग लिया। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल किताबी ज्ञान तक सीमित नहीं रहनी चाहिए और विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास का आकलन भी ज़रूरी है।
परिवहन विभाग के प्रमुख शासन सचिव भवानी सिंह देथा ने सम्मेलन के निष्कर्ष सरकार के साथ साझा करने का आग्रह किया। जिला कलेक्टर गौरव अग्रवाल ने एआई को आने वाली पीढ़ी के लिए चुनौती बताया और विद्यार्थियों को इसके बेहतर उपयोग के लिए तैयार करने की बात कही।
केन्द्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के थर्मल पावर एवं कोयला खनन क्षेत्र के विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष इंदर पाल सिंह मथारू ने धरती माता की रक्षा के महत्व पर बल दिया।
संदर्भ और पृष्ठभूमि
Dainik Bhaskar के अनुसार, पंत ने कहा कि मिशन लाइफ, कैच द रेन, नशामुक्ति अभियान और एक पेड़ माँ के नाम जैसी योजनाओं का हर विद्यालय प्रभावी क्रियान्वयन करे।
