राजस्थान हाईकोर्ट के नाम पर फर्जी जमानत आदेश तैयार कर आरोपी को लाभ पहुंचाने का गंभीर मामला उजागर हुआ है। अदालत ने इस धोखाधड़ी की तह तक जाने के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) से पड़ताल कराने के आदेश दिए हैं।

जोधपुर पुलिस कमिश्नर को डीएसपी रैंक के अधिकारी की अगुवाई में एसआईटी बनाने को कहा गया है, जिसमें साइबर अपराध विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाएगा। एसआईटी को अपनी जांच की रिपोर्ट हर पंद्रह दिन में अदालत में दाखिल करनी होगी।

फर्जी मिले तारीखों के आदेश

न्यायाधीश चंद्रशेखर शर्मा की बेंच के सामने पांच नवंबर को आरोपी कलविंद्र सिंह पनेसर की जमानत अवधि बढ़ाने की याचिका पर सुनवाई चल रही थी। इस दौरान अदालत के सामने बारह, पंद्रह और छब्बीस अक्टूबर के तीन कथित जमानत आदेश रखे गए थे।

न्यायिक रिकॉर्ड से मिलान करने पर यह स्पष्ट हुआ कि इन निर्धारित तिथियों पर अदालत में यह मुकदमा सूचीबद्ध ही नहीं था और न ही संबंधित पीठ द्वारा कोई आदेश दिया गया था। इसके बाद इन सभी दस्तावेजों को जाली करार दिया गया।

रजिस्ट्रार ने दर्ज कराई एफआईआर

इस धोखाधड़ी के सामने आने के बाद हाईकोर्ट के न्यायिक रजिस्ट्रार नरेंद्र कुमार ने जोधपुर के कुड़ी भगतासनी थाने में मुकदमा दर्ज कराया। अदालत ने स्पष्ट किया है कि न्यायिक दस्तावेजों से छेड़छाड़ से संस्था की विश्वसनीयता पर असर पड़ता है।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि आरोपी को छह मई को पत्नी की सर्जरी के वास्ते तीस दिन की अंतरिम जमानत दी गई थी, जिसके एवज में दो लाख रुपये जमा कराने थे। अवधि समाप्त होने के बावजूद नौ जून को वह जेल नहीं लौटा था, जिसके बाद उसके मुचलके खारिज कर गिरफ्तारी वारंट निकाले गए थे।