हैदराबाद के कान्हा शांति वनम में 1‑2 नवंबर 2026 को जनजातीय कार्य मंत्रालय और भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थान (आईसीएमआर‑एनआईएचआर), भुवनेश्वर के सहयोग से सार्वजनिक स्वास्थ्य पर जनजातीय चिकित्सकों के लिए राष्ट्रीय अभिविन्यास कार्यक्रम आयोजित हुआ।

कार्यक्रम का उद्घाटन जनजातीय कार्य मंत्रालय के अपर सचिव श्री मनीष ठाकुर और आईसीएमआर‑एनआईएचआर के निदेशक डॉ. संघमित्रा पति ने किया।

भाग लेने वाले चिकित्सक और उद्देश्य

इस कार्यक्रम में देश के नौ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के राज्य जनजातीय कल्याण विभागों द्वारा नामित लगभग 550 आदिवासी चिकित्सक भाग ले रहे हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रमुख मुद्दों पर चिकित्सकों को उन्मुख करना और सामान्य बीमारियों की समझ को मजबूत करना है।

प्रशिक्षण में संचारी और वेक्टर जनित रोग, त्वचा रोग, गैर‑संचारी रोग, चयापचय और रक्त विकार, यकृत रोग, मानसिक स्वास्थ्य, सर्पदंश, बिच्छू डंक, जानवरों के काटने, चोट, आंख और कान के विकार, मौखिक स्वास्थ्य तथा नवजात और शिशु की देखभाल जैसे विषय शामिल हैं।

प्रशिक्षण का ढाँचा

दो दिवसीय कार्यक्रम में तीन प्रशिक्षण मॉड्यूल होंगे, जिनमें एकीकृत अभ्यास, समीक्षा सत्र और प्रशिक्षण पश्चात मूल्यांकन शामिल हैं। प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया भी एकत्रित की जाएगी।

प्रशिक्षण सत्र क्षेत्रीय भाषाओं में आयोजित होंगे, और एम्स, आईसीएमआर, भारतीय गुणवत्ता नियंत्रण, एमएस स्वामीनाथन फाउंडेशन, अमृता संस्थान, कोच्चि, आईआईएचएमआर, बेंगलुरु और पीरामल स्वास्थ्य, महाराष्ट्र के विशेषज्ञ चिकित्सक संबंधित भाषाओं में सत्र देंगे।

समापन और प्रमाणपत्र वितरण

कार्यक्रम का समापन 2 नवंबर 2026 को प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र वितरित करके किया जाएगा।