25 अक्टूबर को आबूरोड स्थित ब्रह्माकुमारी संस्थान के शान्तिवन परिसर में कृषि विभाग और ब्रह्माकुमारी संस्थान के बीच एक ऐतिहासिक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए।

कृषि आयुक्त श्री नरेश कुमार गोयल ने कृषि विभाग की ओर से और ब्रह्माकुमारी संस्थान की ओर से कृषि एवं ग्रामीण विकास प्रभाग की अध्यक्ष बीके सरला के प्रतिनिधित्व में यह समझौता संपन्न किया।

प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण और क्षमता संवर्धन की योजना

एमओयू के तहत प्रदेश के विभिन्न जिलों में किसानों के लिए प्राकृतिक एवं टिकाऊ खेती से संबंधित प्रशिक्षण शिविर, कार्यशालाएँ, प्रदर्शनियाँ और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाएंगे।

किसानों को मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, जल संरक्षण, जलवायु अनुकूल कृषि तकनीकों और टिकाऊ कृषि प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी उपलब्ध कराई जाएगी।

कृषि कार्मिकों के लिए भी प्राकृतिक खेती की नवीन तकनीकों और प्रभावी कृषि प्रसार गतिविधियों पर प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे मुख्य प्रशिक्षक तैयार होंगे।

आबूरोड का तपोवन बनेगा योगिक प्राकृतिक खेती का उत्कृष्टता केंद्र

समझौते की एक प्रमुख विशेषता आबूरोड स्थित तपोवन को योगिक प्राकृतिक खेती के उत्कृष्टता केंद्र (सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) के रूप में विकसित करना है।

यह केंद्र प्राकृतिक खेती के प्रशिक्षण, प्रदर्शन, अनुसंधान, ज्ञान-विनिमय और क्षमता संवर्धन की गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा।

कृषि अधिकारियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी ध्यान

एमओयू के अंतर्गत कृषि विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, कार्यक्षमता और सकारात्मक कार्य संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए राजयोग, ध्यान और अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

समझौते की अवधि और कार्ययोजना

यह समझौता तीन वर्ष के लिए प्रभावी रहेगा, जिसे दोनों पक्षों की आपसी सहमति से आगे बढ़ाया जा सकेगा।

दोनों पक्षों द्वारा नोडल अधिकारी नामित किए जाएंगे और वार्षिक संयुक्त कार्ययोजना तैयार की जाएगी, जिसमें प्रशिक्षित किसानों और कृषि कार्मिकों की संख्या, आयोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम और प्राकृतिक खेती अपनाने की प्रगति की समीक्षा शामिल होगी।