श्रीगंगानगर में 2 नवम्बर को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री रवि प्रकाश सुथार (अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश) ने राजस्थान राज्य भारत स्काउट गाईड, श्रीगंगानगर में बाल विवाह व महिला अधिकारों पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया।
शिविर के दौरान एडीजे श्री सुथार ने उपस्थित विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए बताया कि महिलाओं को अपने अधिकारों की जानकारी होना ही सशक्तिकरण की पहली सीढ़ी है। उन्होंने दहेज प्रथा को समाज के लिए एक गंभीर कलंक बताया और दहेज प्रतिषेध अधिनियम, 1961 के तहत दहेज लेने, देने या इसके लेनदेन में सहयोग करने को गैर‑कानूनी अपराध बताया।
एडीजे ने बाल विवाह के बारे में भी बताया कि यह भारत में एक व्यापक सामाजिक चुनौती है। बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत विवाह के लिए लड़की की आयु 18 वर्ष से एवं लड़के की आयु 21 वर्ष से कम नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि बाल विवाह विशेष रूप से ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में गरीबी, लैंगिक असमानता और स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ावा देता है।
शिविर में उपस्थितजन को पालना गृह के बारे में भी जानकारी दी गई। यदि किसी को सड़क या झाड़ियों में नवजात शिशु मिले तो उसे तुरन्त राजकीय चिकित्सालय श्रीगंगानगर या राजकीय संरक्षण गृह में संचालित पालना गृह पहुँचाने का आग्रह किया गया।
चीफ श्री रोहताश यादव, लीगल डिफेंस काउंसिल ने उपस्थितजन को पीड़ित प्रतिकर योजना, राष्ट्रीय लोक अदालत एवं स्थाई लोक अदालत की कार्य प्रणाली के बारे में विस्तार से बताया। मंच का संचालन श्री अमन चलाना द्वारा किया गया और निःशुल्क विधिक सहायता व नालसा हेल्पलाइन नं. 15100 के बारे में जानकारी दी गई।
