राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी शिखर अग्रवाल और उनके परिजनों द्वारा एक निजी कंपनी से लगभग 40 कॉटेज‑विला खरीदे जाने के आरोपों की जांच एसीबी को सौंपने की मंजूरी दी, मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के निर्देश पर।
एसीबी महानिदेशक गोविन्द गुप्ता ने बताया कि उद्योग विभाग की रिपोर्ट और गोपनीय स्रोतों से मिली जानकारी के आधार पर प्राथमिक जांच दर्ज की गई है, जिसमें पद के दुरुपयोग और निजी कंपनी को रियायतें देने के संकेत मिले हैं।
जांच के दायरे और अनुमतियां
राज्य सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 2018 की धारा 17‑ए के तहत एसीबी को विस्तृत जांच करने की अनुमति दी है। एजेंसी अब लेन‑देन की वास्तविक राशि, संपत्तियों के बाजार मूल्य और किसी भी अनियमितता की पड़ताल करेगी।
शिखर अग्रवाल को इस प्रकरण के सामने आने के बाद दो दिन पहले अतिरिक्त मुख्य सचिव के पद से एपीओ कर दिया गया था, जिससे वह उद्योग एवं एमएसएमई विभाग, डीएमआईसी, रीको और निवेश संवर्धन ब्यूरो जैसी जिम्मेदारियों से मुक्त हो गए।
विला खरीद के विवरण
- उदयपुर के बुझड़ा स्थित रिसॉर्ट में मार्च 2026 में शिखर अग्रवाल और उनकी पत्नी के नाम पर 10‑10 विला, कीमत लगभग ₹15 लाख प्रति विला।
- अलवर के अजबगढ़ में शिखर अग्रवाल‑प्रशाखा के नाम पर 8 विला (₹16.5 लाख), दोनों बेटों के नाम पर 4 विला (₹15 लाख) और सास‑ससुर के नाम पर 4 विला (₹16.5 लाख)।
- सभी लेन‑देन में बताई गई कीमतें बाजार मूल्य से काफी कम पाई गईं।
जांच में यह भी देखी जाएगी कि कंपनी को रिसॉर्ट निर्माण की शर्तों में छूट, प्रमाण‑पत्रों की जाँच के बिना स्वीकृतियां और विशेष आर्थिक रियायती पैकेज मिले या नहीं, जिससे राज्य को संभावित आर्थिक नुकसान हो सकता है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस मामले में ईडी‑सीबीआई की जांच की मांग की, यह कहते हुए कि केवल एपीओ से जिम्मेदारी नहीं मिटती। उन्होंने मुख्यमंत्री के रिश्तेदार प्रमोद शर्मा के बारे में भी सवाल उठाए।

