- अर्बन मोबिलिटी को शुरुआत से ही अर्बन प्लानिंग के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए: केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल
- केंद्रीय मंत्री ने भविष्य की अर्बन मोबिलिटी के तीन स्तंभों के रूप में इंटीग्रेशन, इंक्लूसिवनेस और इंटेलिजेंस का आह्वान किया
- दिसंबर 2025 से अब तक 59,000 करोड़ रुपये से अधिक की नौ मेट्रो परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है; 28 शहरों में 1,100 इलेक्ट्रिक बसें परिचालन में हैं: श्री मनोहर लाल
- केंद्रीय मंत्री ने शहरी परिवहन में उत्कृष्टता और सर्वोत्तम प्रथाओं के लिए पुरस्कार प्रदान किए; 28 प्रदर्शकों ने नवाचारों और मोबिलिटी समाधानों का प्रदर्शन किया
19वां अर्बन मोबिलिटी इंडिया (यूएमआई) सम्मेलन और प्रदर्शनी 2026 आज ओडिशा के भुवनेश्वर में संपन्न हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय आवासन एवं शहरी कार्य तथा ऊर्जा मंत्री, श्री मनोहर लाल ने समापन सत्र को संबोधित किया और शहरी परिवहन में उत्कृष्टता तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के लिए पुरस्कार प्रदान किए। 23-24 अक्टूबर 2026 को आयोजित यह दो दिवसीय सम्मेलन आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) द्वारा ओडिशा सरकार के सहयोग से इंस्टीट्यूट ऑफ अर्बन ट्रांसपोर्ट (इंडिया) के माध्यम से आयोजित किया गया था।
समापन सत्र में ओडिशा सरकार के आवासन एवं शहरी विकास मंत्री डॉ. कृष्ण चंद्र महापात्र, ओडिशा सरकार के आवासन एवं शहरी विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती उषा पाधी तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी, नीति निर्माता, शहरी परिवहन विशेषज्ञ और भारत व विदेश से आए प्रतिनिधि शामिल हुए।
समापन सत्र को संबोधित करते हुए , श्री मनोहर लाल ने इस बात पर जोर दिया कि अर्बन मोबिलिटी को शुरुआत से ही अर्बन प्लानिंग के साथ एकीकृत किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बेहतर परिवहन बुनियादी ढांचा अब केवल विकास का परिणाम नहीं रह गया है, बल्कि आर्थिक विकास और शहरी विकास की नींव बन चुका है। उन्होंने नागरिकों की आवागमन की जरूरतों के अनुसार शहरों की योजना बनाने तथा कार्यस्थलों, स्कूलों, अस्पतालों और अन्य आवश्यक सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के महत्व पर प्रकाश डाला।
केन्द्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि भारत की भावी शहरी परिवहन प्रणालियों को 3-आई - इंटीग्रेशन , इंक्लूसिवनेस और इंटेलिजेंस के तीन सिद्धांतों द्वारा संचालित किया जाना चाहिए। उन्होंने विस्तार से बताया कि इंटीग्रेशन का अर्थ मेट्रो, बस, रेल और अन्य परिवहन सेवाओं के बीच सुचारू कनेक्टिविटी प्रदान करना है, जिसमें मजबूत फ़र्स्ट और लास्ट-माइल कनेक्टिविटी शामिल है। इंक्लूसिवनेस के तहत महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों और समाज के सभी वर्गों के लिए सुरक्षित, सुलभ और सुविधाजनक परिवहन की आवश्यकता पर बल दिया गया है। वहीं, इंटेलिजेंस में ट्रैफ़िक प्रबंधन, यात्री सुरक्षा और सार्वजनिक परिवहन की दक्षता में सुधार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और रियल-टाइम डेटा का उपयोग शामिल है।
शहरी परिवहन बुनियादी ढांचे में हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए श्री मनोहर लाल ने बताया कि दिसंबर 2025 से भारत सरकार ने ₹59,000 करोड़ से अधिक की लागत से लगभग 174 किलोमीटर क्षेत्र को कवर करने वाली नौ मेट्रो परियोजनाओं को मंजूरी दी है। इसी अवधि के दौरान, 102 किलोमीटर का अतिरिक्त मेट्रो नेटवर्क परिचालन में आ चुका है। उन्होंने आगे कहा कि भारत का परिचालन योग्य मेट्रो नेटवर्क 26 शहरों में फैलकर 1,185 किलोमीटर हो गया है।
केन्द्रीय मंत्री ने पीएम ई-बस सेवा योजना के तहत हुई प्रगति पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि 28 शहरों में 1,100 इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू हो चुका है, जिनमें प्रतिदिन औसतन लगभग 2.5 लाख यात्री यात्रा कर रहे हैं। अप्रैल 2026 में दिल्ली के लिए स्वीकृत ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) नीति 2026 का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह नीति मेट्रो, आरआरटीएस और रेलवे कॉरिडोर के आसपास लगभग 207 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में योजनाबद्ध विकास और किफायती आवास को बढ़ावा देगी।
सम्मेलन के दौरान हुई चर्चाओं का उल्लेख करते हुए केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि दो दिनों में 14 सत्र आयोजित किए गए, जिनमें भारत और विदेश के लगभग 1,500 प्रतिनिधियों और विशेषज्ञों ने भाग लिया। उन्होंने उल्लेख किया कि 28 प्रदर्शकों ने शहरी परिवहन के क्षेत्र में नए नवाचारों और समाधानों को प्रदर्शित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि चर्चाओं में मोबिलिटी को नगर नियोजन में एकीकृत करने तथा मेट्रो, बस व अन्य परिवहन सेवाओं की साक्ष्य-आधारित योजना तैयार करने के लिए टेलीकॉम नेटवर्क, मोबाइल एप्लिकेशन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के आंकड़ों का उपयोग करने पर विशेष जोर दिया गया।
श्री मनोहर लाल ने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि सम्मेलन में पैदल चलने, साइकिल चलाने, लोगों के अनुकूल सड़कों तथा महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों की आवागमन संबंधी जरूरतों पर भी ध्यान दिया गया है। शहरी परिवहन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए सम्मानित किए गए राज्यों, शहरों और संगठनों को बधाई देते हुए, उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से आग्रह किया कि वे सम्मेलन से निकले सुझावों को ठोस कार्य योजनाओं में बदलें, जिससे नागरिकों को वास्तविक लाभ मिल सके।
इस अवसर पर बोलते हुए , ओडिशा सरकार के आवासन एवं शहरी विकास मंत्री डॉ. कृष्ण चंद्र महापात्र ने कहा कि किसी सम्मेलन की वास्तविक सफलता केवल चर्चा किए गए विचारों में नहीं, बल्कि उन्हें धरातल पर सार्थक कार्रवाई में बदलने में निहित है। उन्होंने कहा कि 19वें अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन ने नीति निर्माताओं, शहरी विशेषज्ञों, उद्योग साझेदारों और अन्य हितधारकों को अनुभवों, नवीन विचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं का आदान-प्रदान करने के लिए एक मूल्यवान मंच प्रदान किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि शहरों की जरूरतों के अनुकूल व्यावहारिक समाधानों में सम्मेलन से मिली सीखों को परिवर्तित किया जाना चाहिए, जिसका मुख्य उद्देश्य शहरी स्थानों को अधिक सुरक्षित, सुलभ, समावेशी और रहने योग्य बनाना हो।
ओडिशा सरकार की मुख्य सचिव श्रीमती अनु गर्ग ने इस बात पर जोर दिया कि अर्बन मोबिलिटी केवल सड़कों, बसों और बुनियादी ढांचे तक ही सीमित नहीं है। उन्होंने रेखांकित किया कि शहरी विकास की शुरुआत नागरिकों की बुनियादी जरूरतों से होनी चाहिए, जिनमें सुरक्षित पेयजल, कुशल सार्वजनिक परिवहन, स्वच्छ परिवेश और सुनियोजित सार्वजनिक स्थान शामिल हैं। ओडिशा की शहरी पहलों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने 11 शहरों में ड्रिंक फ्रॉम टैप (नल से पेयजल) पहल के विस्तार और 114 शहरी क्षेत्रों में पाइप से पीने के पानी की कवरेज पर प्रकाश डाला। उन्होंने शहरी सुधारों को नागरिकों के दैनिक जीवन में सुधार के रूप में बदलने के लिए समन्वित नियोजन, संस्थागत मजबूती और प्रभावी कार्यान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।
ओडिशा सरकार की आवासन एवं शहरी विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव ने अपने संबोधन में कहा, 'ओडिशा 19वें अर्बन मोबिलिटी इंडिया कॉन्फ्रेंस एंड एग्जीबिशन और नेशनल अर्बन कॉन्क्लेव 2026 की मेजबानी करने पर गर्व महसूस करता है। पिछले कुछ दिनों के दौरान हुई चर्चाएं और विचार-विमर्श वास्तव में बहुत समृद्ध और आकर्षक रहे हैं, जिन्होंने सतत शहरी विकास और जन-केंद्रित मोबिलिटी पर बहुमूल्य विचारों और दृष्टिकोणों को एक मंच पर ला खड़ा किया है। मेजबान होने के नाते, हमने अतिथि देवो भव: की भावना को बनाए रखने का प्रयास किया, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि प्रत्येक प्रतिनिधि ओडिशा में स्वागत और सम्मान का अनुभव करे। हमें उम्मीद है कि इस मंच से मिले विचार, सहयोग और साझेदारियां भविष्य के लिए समावेशी, सुलभ और सतत शहरों के निर्माण की दिशा में सार्थक कदमों में बदलेंगे।
शहरी परिवहन में उत्कृष्टता और सर्वोत्तम प्रथाओं के लिए पुरस्कार
समापन सत्र के दौरान, श्री मनोहर लाल ने डॉ. कृष्ण चंद्र महापात्र के साथ मिलकर शहरी परिवहन में उत्कृष्टता और सर्वोत्तम प्रथाओं को मान्यता देने वाले पुरस्कार प्रदान किए। इन पुरस्कारों के माध्यम से सार्वजनिक परिवहन में सुधार करने, सस्टेनेबल मोबिलिटी को बढ़ावा देने और शहरी परिवहन प्रणालियों को मजबूत करने के लिए शहरों, राज्यों और परिवहन संगठनों द्वारा की गई नवीन पहलों को सम्मानित किया गया।
विभिन्न श्रेणियों के अंतर्गत निम्नलिखित संगठनों को सम्मानित किया गया:
सर्वश्रेष्ठ ग्रीन ट्रांसपोर्ट पहल वाला शहर: भुवनेश्वर – कॉम्प्रिहेंसिव रीजन अर्बन ट्रांसपोर्ट (सीआरयूटी)
सर्वश्रेष्ठ नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट सिस्टम वाला शहर: चेन्नई – ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन
नवाचार और स्मार्ट मोबिलिटी समाधान में उत्कृष्टता: दिल्ली – दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) एवं दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (डीएमआरसी)
सर्वश्रेष्ठ सार्वजनिक परिवहन प्रणाली वाला शहर: दिल्ली – दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी)
सर्वश्रेष्ठ मल्टी-मॉडल इंटीग्रेशन वाला मेट्रो स्टेशन: कोच्चि – कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड (केएमआरएल)
सर्वश्रेष्ठ यात्री सेवाएं और संतुष्टि प्रदान करने वाली मेट्रो रेल: चेन्नई मेट्रो रेल लिमिटेड (सीएमआरएल) एवं नेशनल कैपिटल रीजन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (एनसीआरटीसी - दिल्ली/उत्तर प्रदेश)
परिचालन और साक्ष्य-आधारित परिवहन योजना के लिए बिग डेटा एनालिटिक्स का सर्वश्रेष्ठ उपयोग: दिल्ली – दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी)
सिविल स्ट्रक्चरल डिजाइन के ऑप्टिमाइजेशन के लिए विशेष पुरस्कार: उत्तर प्रदेश – नोएडा मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएमआरसीएल)
19वें अर्बन मोबिलिटी इंडिया (यूएमआई) सम्मेलन एवं प्रदर्शनी 2026: पुरस्कृत संगठनों की सूची
प्रशंसा पुरस्कार
श्रेणी
पुरस्कार श्रेणी
प्रशस्ति / प्रशंसा
शहर / राज्य
संगठन / संस्था
1
ग्रीन ट्रांसपोर्ट पहल वाला शहर
भावनगर
परिवहन विभाग , भावनगर नगर निगम
2
सर्वश्रेष्ठ नॉन-मोटराइज्ड ट्रांसपोर्ट सिस्टम वाला शहर
वारंगल
काकतिया शहरी विकास प्राधिकरण
3
नवाचार और स्मार्ट मोबिलिटी समाधानों में उत्कृष्टता
कोच्चि
कोच्चि मेट्रो रेल लिमिटेड
4
शहरी परिवहन के लिए सबसे व्यावहारिक वित्तपोषण तंत्र वाला शहर
चेन्नई
मेट्रोपॉलिटन ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन (चेन्नई) लिमिटेड
5
सर्वश्रेष्ठ बहु-मॉडल एकीकरण वाला मेट्रो स्टेशन
अहमदाबाद
गुजरात मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड
6
परिचालन और साक्ष्य-आधारित परिवहन योजना के लिए बिग डेटा एनालिटिक्स का सर्वश्रेष्ठ उपयोग
बेंगलुरु
बेंगलुरु ट्रैफिक पुलिस
7
सर्वश्रेष्ठ शहरी परिवहन सुधारों और कार्यान्वयन वाला राज्य / केंद्र शासित प्रदेश
ओडिशा
कंप्रिहेंसिव रीजन अर्बन ट्रांसपोर्ट (सीआरयूटी) , भुवनेश्वर
तकनीकी सत्र और विचार-विमर्श
सम्मेलन के दूसरे दिन तकनीकी सत्र, गोलमेज चर्चाएं और एक पूर्ण सत्र आयोजित किया गया, जिसमें सतत और एकीकृत अर्बन मोबिलिटी के विभिन्न पहलुओं को शामिल किया गया।
लैंड यूज़ एंड ट्रांसपोर्ट बियोंड सिटी लिमिट्स – टीओडी , अर्बन फॉर्म एंड पेरी-अर्बन कॉरिडोर्स विषय पर आयोजित तकनीकी सत्र में पारंपरिक शहर की सीमाओं से परे भूमि उपयोग और परिवहन योजना के एकीकरण पर बल दिया गया। चर्चा के दौरान ट्रांजिट-ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी), सघन शहरी विकास, मास ट्रांजिट कॉरिडोर के आसपास मिश्रित-उपयोग विकास और उपनगरीय क्षेत्रों व प्रमुख परिवहन नेटवर्कों के बीच निर्बाध कनेक्टिविटी की आवश्यकता पर विचार किया गया। इसके अलावा, सत्र में प्रशासनिक चुनौतियों, किफायती आवास से जुड़ाव और ट्रांजिट-ओरिएंटेड पेरी-अर्बन कॉरिडोर के विकास के लिए वित्तपोषण तंत्र की भी समीक्षा की गई।
पीपल-सेंट्रिक स्ट्रैट्स – सेफ , वॉकेबल , साइक्लेबल विषय पर आयोजित राउंड टेबल में पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों और सार्वजनिक सुरक्षा को प्राथमिकता देने वाले शहरी रास्तों के डिजाइन के महत्व पर विचार-विमर्श किया गया। इस दौरान कंटिन्यूअस फुटपाथ, सुरक्षित साइकिलिंग नेटवर्क, सुरक्षित क्रॉसिंग, ट्रैफिक-कामिंग उपायों और सुलभ व जन-अनुकूल सड़कों के निर्माण के लिए संस्थागत तंत्र स्थापित करने जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई।
बिहेवियर चेंज एंड पब्लिक कम्यूनिकेशन – एन्हांसिंग मोडल शिफ्ट थ्रू पब्लिक आउटरीच विषय पर आयोजित राउंड टेबल में नागरिकों को निजी वाहनों के बजाय परिवहन के सतत साधनों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की रणनीतियों की समीक्षा की गई। इस दौरान सार्वजनिक परिवहन के उपयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से लक्षित संचार अभियानों, सामुदायिक भागीदारी, प्रोत्साहनों, डिजिटल ऐप्स और व्यवहार परिवर्तन पहलों पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित किया गया।
इंटेलिजेंस ड्रिवन सेफ एंड सिक्योर मोबिलिटी विषय पर आयोजित राउंड टेबल में शहरी परिवहन की सुरक्षा और दक्षता में सुधार के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रियल-टाइम डेटा, कनेक्टेड इंफ्रास्ट्रक्चर और उभरती डिजिटल तकनीकों के उपयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया। इस दौरान अधिक सुरक्षित और विश्वसनीय मोबिलिटी के लिए इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम, कनेक्टेड वाहनों और तकनीक-आधारित समाधानों की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
रेल-लेड इंटीग्रेटेड अर्बन डेवलपमेंट विषय पर आयोजित प्लेनरी सेशन में सतत और रहने योग्य शहरों के निर्माण में मेट्रो और अन्य मास रैपिड ट्रांजिट प्रणालियों की भूमिका पर चर्चा की गई। इस दौरान आर्थिक रूप से व्यावहारिक रेल-आधारित परिवहन प्रणालियों, निर्बाध मल्टीमॉडल एकीकरण और मजबूत फर्स्ट-एंड-लास्ट-माइल कनेक्टिविटी की आवश्यकता पर बल दिया गया। इसके अलावा, सत्र में इस बात की भी समीक्षा की गई कि मास ट्रांजिट इंफ्रास्ट्रक्चर किस प्रकार एकीकृत शहरी विकास और भविष्य के लिए तैयार मोबिलिटी नेटवर्कों का समर्थन कर सकता है।
सम्मेलन के मुख्य बिंदु
19वें अर्बन मोबिलिटी इंडिया सम्मेलन और प्रदर्शनी का आयोजन अर्बन एक्सेसिबिलिटी एंड लिवेबिलिटी इन डिजिटल एज विषय के तहत किया गया। इस सम्मेलन ने नीति निर्माताओं, केंद्र व राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारियों, अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, परिवहन पेशेवरों, शोधकर्ताओं और उद्योग प्रतिनिधियों को एक साथ लाकर शहरी मोबिलिटी में उभरती चुनौतियों और अवसरों पर विचार-विमर्श करने का मंच प्रदान किया।
ओडिशा सरकार, मेट्रो रेल कंपनियों, सार्वजनिक क्षेत्र के संगठनों और निजी क्षेत्र की संस्थाओं के 28 प्रदर्शकों की भागीदारी वाली एक प्रदर्शनी में शहरी परिवहन में उभरती प्रौद्योगिकियों, नवाचारों और सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रदर्शित किया गया।
सम्मेलन ने रिसर्च सिम्पोजियम के माध्यम से रिसर्च स्कॉलर्स और पीएचडी छात्रों को भी एक मंच प्रदान किया, जिसमें 46 चयनित शोध पत्रों में 20 ओरल प्रेजेंटेशन और 26 पोस्टर प्रस्तुतियां शामिल थीं।
भारतीय शहरों में सुगमता और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाने के उद्देश्य से एकीकृत योजना, साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने की प्रक्रिया, तकनीकी नवाचार और समावेशी सार्वजनिक परिवहन प्रणालियों पर नए सिरे से बल देने के साथ सम्मेलन का समापन हुआ।
