केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने 3 नवंबर 2026 को आर्मेनिया के येरेवन में आयोजित 'कन्वेंशन ऑन बायोलॉजिकल डायवर्सिटी' (सीबीडी सीओपी-17) के 17वें सम्मेलन से इतर 'भारत के अन्य प्रभावी क्षेत्र-आधारित संरक्षण उपायों (आई-ओईसीएम) 2026 के निर्धारण के लिए दिशानिर्देश' जारी किए। इस पहल का उद्देश्य कानूनी रूप से संरक्षित क्षेत्रों के बाहर जैव विविधता के संरक्षण को बढ़ावा देना है।
पर्यावरण मंत्रालय, राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) और संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में आर्मेनिया के पर्यावरण मंत्री और सीबीडी के कार्यकारी सचिव भी उपस्थित थे। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि ओईसीएम संरक्षण के दृष्टिकोण का एक नया दौर है, जिसमें वनों और संरक्षित क्षेत्रों के बाहर प्रभावी लैंडस्केप प्रबंधन के माध्यम से जैव विविधता का प्रभावी इन-सीटू संरक्षण किया जाता है।
मान्यता की शर्तें और आवेदन प्रक्रिया
इन दिशानिर्देशों में जमीनी, आंतरिक जल, तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र शामिल हैं। मान्यता प्राप्त करने के लिए चार शर्तें अनिवार्य हैं, जिनमें क्षेत्र का कानूनी रूप से संरक्षित या आरक्षित न होना, सरकार या मान्यता प्राप्त स्थानीय संस्थाओं द्वारा प्रबंधन, स्पष्ट सीमाएं और मौजूदा गतिविधियों में बदलाव न होना शामिल है।
स्थानीय स्व-शासन और जैव विविधता प्रबंधन समितियों द्वारा एनबीए को आवेदन जमा किए जा सकते हैं। एनबीए प्रारंभिक जांच के बाद 30 दिनों के भीतर आवेदन संबंधित राज्य जैव विविधता बोर्ड को भेजेगा, जो 30 दिनों में अपनी सिफारिश देगा। इसके बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा और हर पांच साल में कम से कम एक बार इसका मूल्यांकन किया जाएगा।
राजस्थान समेत छह प्रदर्शन क्षेत्र शामिल
भारत सरकार ने इन दिशानिर्देशों को लागू करने के लिए एक जीईएफ-8 परियोजना शुरू की है, जिसे 15 मई 2026 से 15 मई 2032 तक चलाया जाएगा। इसका कुल बजट 60.79 मिलियन अमेरिकी डॉलर है। इस परियोजना के तहत छह प्रदर्शन स्थल चुने गए हैं, जिनमें राजस्थान में कुंभलगढ़-माउंट आबू-जैसलमेर क्षेत्र, उत्तराखंड में गोरी घाटी, ओडिशा में सतकोसिया-कालाहांडी क्षेत्र, आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में श्रीशैलम-कंबम क्षेत्र, महाराष्ट्र और गोवा में सह्याद्रि-कोंकण क्षेत्र, तथा लक्षद्वीप द्वीप समूह का समुद्री क्षेत्र शामिल है।
