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केसरिया बालम — मांगणियार सुरों का राजस्थान

थार के रेगिस्तान से उठता मांड गायन, कमायचा की गूँज और खड़ताल की थाप।

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TIMES of RAJASTHAN · दर्शन

केसरिया बालम — मांगणियार सुरों का राजस्थान

थार के रेगिस्तान से उठता मांड गायन, कमायचा की गूँज और खड़ताल की थाप।

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गीत

केसरिया बालम (पारंपरिक मांड)

केसरिया बालम आवो नी, पधारो म्हारे देस

केसरिया बालम आवो नी, पधारो म्हारे देस

पधारो म्हारे देस…

वाद्य यंत्र

कमायचा

कमायचा

आम की लकड़ी और बकरी की खाल से बना गज़ से बजने वाला वाद्य — मांगणियार गायकी की आत्मा।

खड़ताल

खड़ताल

हथेलियों में पकड़ी लकड़ी की चार पट्टियाँ, जिनसे तेज़ और जटिल ताल निकलती है।

ढोलक

दो मुँह वाला ढोल जो लोकगीतों की लय थामे रखता है।

मोरचंग

होंठों से थामकर बजने वाला धातु का छोटा वाद्य — "टुंग-टुंग" की गूँज।

कलाकार और समुदाय

  • मांगणियार

    जैसलमेर-बाड़मेर के पुश्तैनी लोक गायक, जो पीढ़ियों से अपने यजमानों के लिए गाते आए हैं।

  • लंगा

    सिंधी सारंगी और अलगोजा के लिए प्रसिद्ध पश्चिमी राजस्थान का गायक समुदाय।

और दृश्य कथाएँ

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तस्वीरें: No Known / Wikimedia Commons (Public domain) · Ji-Elle / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0) · Jean-Pierre Dalbéra from Paris, France / Wikimedia Commons (CC BY 2.0) · Clément Bardot / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0) · Rudolph.A.furtado / Wikimedia Commons (CC0) · Siddharth 36 / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0) · Imagedb / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)

राजस्थान री बात

हर दिन मरुधरा की एक कहावत, एक सबद, एक ज़िलो

आज री कहावत

“पाणी पीजे छाण कर, गुरु कीजे जाण कर”

पानी छानकर पियो और गुरु सोच-समझकर बनाओ।

आज रो सबद

मनवार

मेहमान को प्रेम से आग्रह करके खिलाना-पिलाना

आज रो ज़िलो

चित्तौड़गढ़

  • चित्तौड़गढ़ किला
  • विजय स्तंभ
  • मीरा बाई

मेळा-तेवार

इस महीने: पुष्कर मेला, बूंदी उत्सव

कुंभलगढ़ महोत्सव

राजसमंद · दिसंबर

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