केसरिया बालम — मांगणियार सुरों का राजस्थान
थार के रेगिस्तान से उठता मांड गायन, कमायचा की गूँज और खड़ताल की थाप।
TIMES of RAJASTHAN · दर्शन
केसरिया बालम — मांगणियार सुरों का राजस्थान
थार के रेगिस्तान से उठता मांड गायन, कमायचा की गूँज और खड़ताल की थाप।
गीत
केसरिया बालम (पारंपरिक मांड)
केसरिया बालम आवो नी, पधारो म्हारे देस
केसरिया बालम आवो नी, पधारो म्हारे देस
पधारो म्हारे देस…
वाद्य यंत्र

कमायचा
आम की लकड़ी और बकरी की खाल से बना गज़ से बजने वाला वाद्य — मांगणियार गायकी की आत्मा।

खड़ताल
हथेलियों में पकड़ी लकड़ी की चार पट्टियाँ, जिनसे तेज़ और जटिल ताल निकलती है।
ढोलक
दो मुँह वाला ढोल जो लोकगीतों की लय थामे रखता है।
मोरचंग
होंठों से थामकर बजने वाला धातु का छोटा वाद्य — "टुंग-टुंग" की गूँज।
कलाकार और समुदाय
मांगणियार
जैसलमेर-बाड़मेर के पुश्तैनी लोक गायक, जो पीढ़ियों से अपने यजमानों के लिए गाते आए हैं।
लंगा
सिंधी सारंगी और अलगोजा के लिए प्रसिद्ध पश्चिमी राजस्थान का गायक समुदाय।
और दृश्य कथाएँ
लोक नृत्यघूमर — घेरदार घाघरे का नृत्यगणगौर, तीज और शादियों में घूमते घाघरे, लहराती ओढ़नी और तालियों की लय।3 दृश्य · संगीत के साथ · ♥ 13
लोक नृत्यकालबेलिया — सर्प-नृत्य, UNESCO की विरासतपुंगी की धुन पर नागिन-सी लहराती देह; 2010 से UNESCO की अमूर्त विरासत सूची में।4 दृश्य · संगीत के साथ · ♥ 1
चित्रकलाफड़ और रावणहत्था — चलती-फिरती गाथाभोपा-भोपी रात भर फड़ के सामने रावणहत्था बजाकर लोक देवताओं की कथा गाते हैं।4 दृश्य · संगीत के साथ · ♥ 5
किले-महलमेहरानगढ़ — सूर्य नगरी का मुकुट1459 में राव जोधा ने चिड़ियाटूँक पहाड़ी पर इसकी नींव रखी; नीचे फैली है नीली नगरी।4 दृश्य · संगीत के साथ · ♥ 4तस्वीरें: No Known / Wikimedia Commons (Public domain) · Ji-Elle / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0) · Jean-Pierre Dalbéra from Paris, France / Wikimedia Commons (CC BY 2.0) · Clément Bardot / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0) · Rudolph.A.furtado / Wikimedia Commons (CC0) · Siddharth 36 / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0) · Imagedb / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)





