टाइम्स ऑफ़ राजस्थान · राजस्थान दर्शन

केसरिया बालम — मांगणियार सुरों का राजस्थान

थार के रेगिस्तान से उठता मांड गायन, कमायचा की गूँज और खड़ताल की थाप।

राजस्थान दर्शन · 1/5

रेत के समंदर से उठता सुर

थार की शामों में मांगणियार कलाकार जब तान छेड़ते हैं, तो रेगिस्तान की ख़ामोशी गीत बन जाती है।

No Known / Wikimedia Commons (Public domain)

राजस्थान दर्शन · 2/5

कमायचा की गूँज

आम की लकड़ी से बना कमायचा, जिसके तारों पर गज़ चलते ही गहरी, गूँजती ध्वनि निकलती है।

Ji-Elle / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

राजस्थान दर्शन · 3/5

खड़ताल की थाप

हथेलियों में थमी लकड़ी की पट्टियाँ — उँगलियों के जादू से घोड़े की टाप जैसी ताल।

Jean-Pierre Dalbéra from Paris, France / Wikimedia Commons (CC BY 2.0)

राजस्थान दर्शन · 4/5

सोनार किले की छाँव में

जैसलमेर का सोनार किला — जिसकी गलियों और हवेलियों में यह संगीत सदियों से बसता है।

Clément Bardot / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

राजस्थान दर्शन · 5/5

पधारो म्हारे देस

"पधारो म्हारे देस" — मेहमान को न्योता देता यह गीत आज राजस्थान की पहचान है।

Rudolph.A.furtado / Wikimedia Commons (CC0)

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