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फड़ और रावणहत्था — चलती-फिरती गाथा

भोपा-भोपी रात भर फड़ के सामने रावणहत्था बजाकर लोक देवताओं की कथा गाते हैं।

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TIMES of RAJASTHAN · दर्शन

फड़ और रावणहत्था — चलती-फिरती गाथा

भोपा-भोपी रात भर फड़ के सामने रावणहत्था बजाकर लोक देवताओं की कथा गाते हैं।

वेब स्टोरी में देखें

वाद्य यंत्र

रावणहत्था

रावणहत्था

नारियल के खोल और बाँस से बना प्राचीन गज़-वाद्य, जिसे भोपा फड़ वाचन में बजाते हैं।

कलाकार और समुदाय

  • भोपा-भोपी

    लोक देवताओं के पुजारी-गायक, जो फड़ के दृश्य दिखाते हुए कथा गाते हैं।

और दृश्य कथाएँ

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तस्वीरें: Nomu420 / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0) · MicheleLovesArt / Wikimedia Commons (CC BY-SA 2.0) · Clément Bardot / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0) · Marc Chang Sing Pang / Wikimedia Commons (CC BY-SA 2.0) · Harshil Mehta / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)

राजस्थान री बात

हर दिन मरुधरा की एक कहावत, एक सबद, एक ज़िलो

आज री कहावत

“पाणी पीजे छाण कर, गुरु कीजे जाण कर”

पानी छानकर पियो और गुरु सोच-समझकर बनाओ।

आज रो सबद

मनवार

मेहमान को प्रेम से आग्रह करके खिलाना-पिलाना

आज रो ज़िलो

चित्तौड़गढ़

  • चित्तौड़गढ़ किला
  • विजय स्तंभ
  • मीरा बाई

मेळा-तेवार

इस महीने: पुष्कर मेला, बूंदी उत्सव

कुंभलगढ़ महोत्सव

राजसमंद · दिसंबर

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