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कविताएँ › भक्ति · राजस्थानी

भक्ति · राजस्थानी

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो

मीराबाई · 16वीं सदी · मेड़ता, राजस्थान

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो॥

जनम-जनम की पूँजी पाई, जग में सभी खोवायो।खरच न खूटै, चोर न लूटै, दिन-दिन बढ़त सवायो॥

सत की नाव खेवटिया सतगुरु, भवसागर तर आयो।मीरा के प्रभु गिरधर नागर, हरख-हरख जस गायो॥

— मीराबाई

भावार्थमीरा कहती हैं कि गुरु की कृपा से उन्हें राम-नाम रूपी अनमोल धन मिल गया है। यह ऐसा धन है जो न ख़र्च करने से घटता है, न चोर इसे लूट सकता है — उलटे दिन-ब-दिन बढ़ता है। सत्य की नाव और गुरु रूपी मल्लाह के सहारे वे संसार-सागर पार कर आई हैं और आनंद से प्रभु का यश गाती हैं।

मीराबाई (लगभग 1498–1547) मेड़ता (नागौर) के राठौड़ राजघराने की राजकुमारी और कृष्ण-भक्ति की सबसे प्रसिद्ध कवयित्री थीं। उनके पद राजस्थानी और ब्रज मिश्रित भाषा में हैं।

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भक्ति · राजस्थानी

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई

मीराबाई · 16वीं सदी · मेड़ता, राजस्थान

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई॥

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— मीराबाई

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लोकगीत · राजस्थानी

केसरिया बालम, पधारो म्हारे देस

राजस्थानी लोकगीत (पारंपरिक) · मांड गायकी · ढोला-मारू की परंपरा

केसरिया बालम आवो नी, पधारो म्हारे देस।केसरिया बालम आवो नी, पधारो म्हारे देस॥

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— राजस्थानी लोकगीत (पारंपरिक)

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नीति (दोहे) · ब्रज

रहीम के दोहे

अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना · 16वीं–17वीं सदी

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥

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— अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना

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नीति (दोहे) · हिन्दी

कबीर के दोहे

कबीरदास · 15वीं सदी

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।जो दिल खोजा आपना, मुझ-सा बुरा न कोय॥

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— कबीरदास

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राजस्थान री बात

हर दिन मरुधरा की एक कहावत, एक सबद, एक ज़िलो

आज री कहावत

“पाणी पीजे छाण कर, गुरु कीजे जाण कर”

पानी छानकर पियो और गुरु सोच-समझकर बनाओ।

आज रो सबद

मनवार

मेहमान को प्रेम से आग्रह करके खिलाना-पिलाना

आज रो ज़िलो

चित्तौड़गढ़

  • चित्तौड़गढ़ किला
  • विजय स्तंभ
  • मीरा बाई

मेळा-तेवार

इस महीने: पुष्कर मेला, बूंदी उत्सव

कुंभलगढ़ महोत्सव

राजसमंद · दिसंबर

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