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कविताएँ › नीति (दोहे) · हिन्दी

नीति (दोहे) · हिन्दी

कबीर के दोहे

कबीरदास · 15वीं सदी

बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलिया कोय।जो दिल खोजा आपना, मुझ-सा बुरा न कोय॥

पोथी पढ़ि-पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय।ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय॥

साईं इतना दीजिए, जा में कुटुम समाय।मैं भी भूखा न रहूँ, साधु न भूखा जाय॥

धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।माली सींचे सौ घड़ा, ऋतु आए फल होय॥

काल करे सो आज कर, आज करे सो अब।पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब॥

ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।औरन को सीतल करै, आपहु सीतल होय॥

— कबीरदास

भावार्थकबीर सिखाते हैं — दूसरों में बुराई खोजने से पहले अपने भीतर झाँको; किताबें रटने से नहीं, प्रेम समझने से ज्ञान आता है; उतना ही माँगो जितने में परिवार और अतिथि दोनों का पेट भरे; हर काम का अपना समय है, धैर्य रखो; पर जो करना है उसे टालो मत; और ऐसी वाणी बोलो जो दूसरों को भी शीतल करे और ख़ुद को भी।

संत कबीर के दोहे सरल भाषा में जीवन की गहरी सीख देते हैं और सदियों से जन-जन की ज़ुबान पर हैं।

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नीति (दोहे) · ब्रज

रहीम के दोहे

अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना · 16वीं–17वीं सदी

रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो चटकाय।टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥

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— अब्दुर्रहीम ख़ानख़ाना

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लोकगीत · राजस्थानी

केसरिया बालम, पधारो म्हारे देस

राजस्थानी लोकगीत (पारंपरिक) · मांड गायकी · ढोला-मारू की परंपरा

केसरिया बालम आवो नी, पधारो म्हारे देस।केसरिया बालम आवो नी, पधारो म्हारे देस॥

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— राजस्थानी लोकगीत (पारंपरिक)

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भक्ति · राजस्थानी

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई

मीराबाई · 16वीं सदी · मेड़ता, राजस्थान

मेरे तो गिरधर गोपाल, दूसरो न कोई।जाके सिर मोर मुकुट, मेरो पति सोई॥

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— मीराबाई

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भक्ति · राजस्थानी

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो

मीराबाई · 16वीं सदी · मेड़ता, राजस्थान

पायो जी मैंने राम रतन धन पायो।वस्तु अमोलक दी मेरे सतगुरु, किरपा कर अपनायो॥

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— मीराबाई

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राजस्थान री बात

हर दिन मरुधरा की एक कहावत, एक सबद, एक ज़िलो

आज री कहावत

“पाणी पीजे छाण कर, गुरु कीजे जाण कर”

पानी छानकर पियो और गुरु सोच-समझकर बनाओ।

आज रो सबद

मनवार

मेहमान को प्रेम से आग्रह करके खिलाना-पिलाना

आज रो ज़िलो

चित्तौड़गढ़

  • चित्तौड़गढ़ किला
  • विजय स्तंभ
  • मीरा बाई

मेळा-तेवार

इस महीने: पुष्कर मेला, बूंदी उत्सव

कुंभलगढ़ महोत्सव

राजसमंद · दिसंबर

राजस्थान दर्शन →