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टाइम्स ऑफ़ राजस्थान ई-पेपर — रविवार, 1 नवंबर 2026

राजस्थान संस्करण · 5 पृष्ठ

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टेक

राजस्थान का टेक परिदृश्य: कहाँ ठहरा है और कैसे विस्तार करे?

राजस्थान के लिए पिछले कुछ वर्षों में डिजिटल दुनिया में एक उभरते केंद्र के रूप में खुद को पेश करना एक बात है। कागज पर इसकी प्रगति दिखती है: ई-गवर्नेंस का ढांचा बहुत मजबूत है, जयपुर और जोधपुर में बड़ी डेटा सेंटर की क्षमता, आई-स्टार्ट तंत्र और महिंद्रा वर्ल्ड सिटी सेज़। लेकिन जब हम इसके आंकड़ों के साथ आगे बढ़ते हैं, तो एक बड़ा अंतर्विरोध दिखाई देता है।

राज्य के बड़े हिस्से के साथ अच्छे संस्थान भी हैं, लेकिन देश के आईटी निर्यात में इसकी हिस्सेदारी बस 1 प्रतिशत से भी कम है। जबकि देश के आईटी निर्यात का आंकड़ा 11 लाख करोड़ रुपए से ऊपर है, राजस्थान के निर्यात के आंकड़े केवल 3,200 से 3,500 करोड़ रुपए हैं।

अंतर्विरोध विज़न की कमी नहीं, बल्कि ढांचागत असंतुलन है। राजस्थान को बैक-ऑफ़िस केंद्र नहीं, बल्कि नवाचार केंद्र बनाना है। इसके लिए हमें खामियों को जानना होगा और डेटा हमें रास्ता दिखाएगा।

राजस्थान कहाँ पिछड़ रहा है?

1. कम लागत में सेवाओं का दबाव और बौद्धिक पलायन

दूसरे शहरों ने हाई-मार्जिन सास, एआई और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर की ओर रुख किया है, जबकि राजस्थान में आईटी अब भी बेसिक बीपीओ और सपोर्ट सेवाओं तक सीमित है।

राज्य की कम लागत और सस्ती स्थिति बैक-ऑफ़िस ऑपरेशंस के लिए आकर्षित करती है, लेकिन रिसर्च और डेवलपमेंट के लिए आवश्यक टीमें नहीं आतीं। इसके कारण उच्च अनुभाग के छात्र राज्य छोड़ देते हैं क्योंकि वहाँ उत्पाद निर्माण का उचित इकोसिस्टम नहीं है।

2. जयपुर केंद्रित विकास और टियर-2 और 3 का अभाव

राज्य में 75% से अधिक स्टार्टअप जयपुर तक सीमित हैं।

इसके बावजूद, बीकानेर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर जैसे शहर अभी तक पूरी क्षमता से जुड़ नहीं पाए हैं। इन शहरों में बड़े शैक्षणिक संस्थान हैं, लेकिन वे अपने क्षेत्र में विकास के लिए उपलब्ध नहीं हैं। इस वजह से यहाँ के छात्र जयपुर या राज्य से बाहर जाने पर मजबूर होते हैं।

3. जोखिम-पूंजी की कमी

सरकारी अनुदान अच्छे हैं, लेकिन निजी वेंचर कैपिटल बाज़ार अभी भी संकुचित है।

राजस्थान में उद्यमिता बहुत अच्छी है, लेकिन निवेश अभी भी रियल एस्टेट और खनन में ही होता है। बौद्धिक संपदा और हार्डवेयर वाले स्टार्टअप वेंचर कैपिटल से बाहर हो जाते हैं क्योंकि वहाँ इस तरह के निवेशक नहीं हैं।

4. कोर बौद्धिक संपदा का अभाव

अधिकांश स्टार्टअप्स एग्रीगेटर मॉडल या डिजिटल मार्केटिंग पर काम करते हैं। एग्रीटेक या आईओटी सिस्टम पर काम करने वाले बहुत कम स्टार्टअप हैं। बिना पेटेंट के यह व्यवसाय बाहरी प्रतिस्पर्धा के आगे टिक नहीं सकते।

संभावनाओं का रोडमैप: कहाँ निर्माण करना है?

राजस्थान को बेंगलुरु की तरह नकल नहीं करनी है। इसके लिए अपनी विशिष्ट भौगोलिक और औद्योगिक वास्तविकताओं के अनुसार मॉडल चुनना होगा:

1. नवीकरणीय ऊर्जा और स्मार्ट ग्रिड आईएस: सौर ऊर्जा उत्पादन में राज्य अग्रणी है। इसलिए राज्य के स्टार्टअप्स को सौर पैनलों के रखरखाव में रोबोटिक्स और एज-एआई इन्वर्टर सिस्टम पर काम करना चाहिए।

2. औद्योगिक आईओटी और पाइपलाइन सुरक्षा: बाड़मेर रिफाइनरी और खनिज क्षेत्र के लिए नॉन-इनवेसिव सेंसर और संरचनात्मक सुरक्षा के समाधान चाहिए।

3. शुष्क कृषि और परिशुद्ध एग्रीटेक: ग्वार, जीरा, सरसों और इसबगोल के लिए कंप्यूटर-विज़न आधारित ग्रेडिंग और सूक्ष्म-सिंचाई सेंसर नेटवर्क की आवश्यकता है।

4. हरित डेटा सेंटर क्लस्टर्स: सौर ऊर्जा के साथ ग्रीन डेटा सेंटर स्थापित किए जा सकते हैं।

नीतिगत सुधार: क्या कदम उठाने होंगे?

1. स्थानीय तकनीक को सार्वजनिक खरीद में प्राथमिकता: राज्य सरकार अपने प्रोजेक्ट्स में राज्य के पेटेंट धारक स्टार्टअप्स के लिए विशेष कोटा अनिवार्य करे।

2. संभागीय स्तर पर हार्डवेयर लैब्स: बीकानेर, जोधपुर और कोटा में एडवांस्ड फैब्रिकेशन और परीक्षण उपकरण वाले लैब बनाए जाएं।

3. पेटेंट और शोध को वास्तविक प्रोत्साहन: स्टार्टअप्स की सफलता को पेटेंट्स और शोध-पत्रों पर आधारित मूल्यांकन किया जाए।

निष्कर्ष

राजस्थान ने व्यापक सड़कें बनाई हैं, सौर ऊर्जा उत्पन्न की है और डिजिटल योजनाओं को हर गांव तक पहुंचाया है। अब अगला कदम बौद्धिक और तकनीकी मूल्य को राज्य के भीतर सुरक्षित रखना है।

मरुधरा के पारंपरिक अनुशासन और आधुनिक डीप-टेक इंजीनियरिंग के समन्वय से ही राजस्थान उच्च-तकनीक और आत्मनिर्भर समाधान निर्यात करने वाला अग्रणी राज्य बनेगा।

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जयपुर

जयपुर में सरदार वल्लभ भाई पटेल की 151वीं जयंती पर ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन

जयपुर, 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभ भाई पटेल की 151वीं जयंती पर केन्द्रीय शिक्षा, खाद्य एवं उपभोक्ता मामलात मंत्री प्रल्हाद जोशी और मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने ‘रन फॉर यूनिटी’ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

इस अवसर पर प्रल्हाद जोशी ने कहा कि आज हम जिस ‘एक भारत’ को देख रहे हैं, उसके पीछे सरदार पटेल के कुशल नेतृत्व और अथक परिश्रम का ऐतिहासिक योगदान है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता।

सरदार पटेल के ‘एक भारत’ का संकल्प

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरदार पटेल के ‘एक भारत’ के संकल्प को ‘श्रेष्ठ भारत’ के रूप में साकार करने का कार्य चल रहा है।

सरदार पटेल ने 500 से अधिक रियासतों को एकजुट कर अखंड भारत का निर्माण किया और 30 मार्च, 1949 को वृहद राजस्थान को साकार किया।

राजस्थान में एकता का प्रतीक स्टैच्यू ऑफ यूनिटी

गुजरात के केवड़िया में विश्व की सबसे ऊंची प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ स्थापित की गई है, जो राष्ट्र के प्रति उनके समर्पण और एकता के संकल्प का प्रतीक है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने युवाओं से प्रतिमा का अवलोकन करने और सरदार पटेल के जीवन एवं विचारों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

युवाओं के लिए सरकार की योजनाएँ

राज्य सरकार हर नौजवान को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, पारदर्शी भर्तियां, आधुनिक खेल सुविधा और कौशल विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध करवा रही है।

410 परीक्षाएं पूरी पारदर्शिता के साथ संपन्न करवाकर 1 लाख 93 हजार युवाओं को सरकारी नियुक्तियां दी गईं। 1 लाख 18 हजार भर्तियां प्रक्रियाधीन हैं और 70 हजार से अधिक पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द ही शुरू होगी। 5 लाख युवाओं को निजी क्षेत्र में रोजगार उपलब्ध कराया गया है।

रन फॉर यूनिटी में भागीदारी

रन फॉर यूनिटी में कई पदक विजेता खिलाड़ी सहित बड़ी संख्या में युवाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

मुख्यमंत्री ने उपस्थित जनसमूह को राष्ट्रीय एकता की शपथ भी दिलाई। इस अवसर पर युवा मामले एवं खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़, सांसद मदन राठौड़, मंजू शर्मा, महापौर सुनील कोठारी, उप महापौर सरोज कंवर, मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास, पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार शर्मा एवं बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।

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खेल

पीवी सिंधु का रजत पदक: हार के बीच वापसी की उम्मीद और भारतीय बैडमिंटन के लिए बड़ा संदेश

फाइनल में स्वर्ण पदक हासिल नहीं कर पाना निश्चित रूप से निराशाजनक हो सकता है, लेकिन खेल में किसी खिलाड़ी की सफलता का आकलन सिर्फ इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि उसने खिताब जीता या नहीं। कई बार फाइनल तक पहुंचने का सफर भी उतना ही महत्वपूर्ण होता है, जितना खिताब जीतना।

लंबे संघर्ष के बाद मिली उपलब्धि

सिंधु ने अपनी प्रतिक्रिया में स्वीकार किया कि उन्हें इस पल का लंबे समय से इंतजार था। कठिन हार, वर्षों की मेहनत और अभ्यास के अनगिनत घंटों के बाद फ्रेंच ओपन के फाइनल तक पहुंचना उनके धैर्य और प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

एक खिलाड़ी के करियर में ऐसे दौर आते हैं, जब पुरानी सफलताओं के बावजूद नई चुनौतियां सामने खड़ी होती हैं। प्रतिद्वंद्वियों का मजबूत होना, खेल की गति में बदलाव, फिटनेस बनाए रखना और दबाव में प्रदर्शन करना लगातार कठिन होता जाता है। ऐसे में शीर्ष स्तर पर प्रतिस्पर्धा करते रहना अपने आप में बड़ी चुनौती है।

सिंधु की यह उपलब्धि बताती है कि खेल में वापसी का रास्ता हमेशा सीधा नहीं होता। असफलताओं के बाद दोबारा खड़े होने के लिए शारीरिक क्षमता के साथ मानसिक मजबूती भी जरूरी होती है।

स्वर्ण नहीं मिला, लेकिन प्रदर्शन का महत्व कम नहीं

फाइनल में हर खिलाड़ी का लक्ष्य जीतना होता है। सिंधु भी स्वर्ण पदक चाहती थीं, लेकिन उन्हें रजत से संतोष करना पड़ा। यहां सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उन्होंने अपनी निराशा को स्वीकार करते हुए अपनी मेहनत पर भरोसा जताया।

खेल में रजत पदक का अर्थ केवल यह नहीं है कि खिलाड़ी खिताब जीतने से एक कदम पीछे रह गया। इसका अर्थ यह भी है कि उसने पूरे टूर्नामेंट में कठिन मुकाबलों का सामना करते हुए फाइनल तक पहुंचने की योग्यता दिखाई।

हालांकि, इस उपलब्धि को स्वर्ण पदक के बराबर मानना भी सही नहीं होगा। दोनों के बीच अंतर है और सिंधु स्वयं खिताब जीतना चाहती थीं। लेकिन खेल विश्लेषण में परिणाम के साथ खिलाड़ी की यात्रा, प्रदर्शन में निरंतरता और आगे सुधार की संभावनाओं को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

आन से-यंग जैसी चुनौती से क्या सीख मिलती है?

सिंधु ने अपनी प्रतिद्वंद्वी आन से-यंग की सराहना भी की। यह खेल भावना का महत्वपूर्ण उदाहरण है। अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन में प्रतिस्पर्धा का स्तर लगातार ऊंचा हो रहा है और शीर्ष खिलाड़ियों के बीच अंतर कई बार रणनीति, गति, फिटनेस तथा दबाव के क्षणों में लिए गए फैसलों से तय होता है।

आन से-यंग जैसी मजबूत प्रतिद्वंद्वियों के सामने मुकाबला भारतीय खिलाड़ियों के लिए अपनी रणनीतियों का मूल्यांकन करने का अवसर भी है। ऐसे मुकाबलों से यह समझने में मदद मिलती है कि किन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है और विश्व स्तर पर खिताब जीतने के लिए किस तरह की तैयारी आवश्यक है।

हालांकि, केवल फाइनल के परिणाम के आधार पर सिंधु की तकनीक या रणनीति की कमियां तय नहीं की जा सकतीं। इसके लिए मैच के आंकड़ों, रैली की अवधि, गलतियों, कोर्ट कवरेज और निर्णायक अंकों के विश्लेषण की जरूरत होती है।

भारतीय बैडमिंटन के लिए क्या है संदेश?

सिंधु की उपलब्धि भारतीय बैडमिंटन के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल भी रखती है—क्या भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार खिताब जीतने वाले खिलाड़ियों की नई पीढ़ी तैयार कर पा रहा है?

भारत ने बैडमिंटन में कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी दिए हैं। लेकिन किसी खेल में एक-दो स्टार खिलाड़ियों की सफलता पर्याप्त नहीं होती। मजबूत खेल व्यवस्था के लिए जूनियर स्तर से प्रतिभाओं की पहचान, आधुनिक प्रशिक्षण सुविधाएं, उच्चस्तरीय कोचिंग, खेल विज्ञान, फिटनेस और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में नियमित भागीदारी आवश्यक है।

सिंधु जैसी अनुभवी खिलाड़ी की उपलब्धियों का लाभ नई पीढ़ी को प्रेरणा के रूप में मिलना चाहिए। साथ ही, उनके अनुभव से सीख लेकर ऐसे खिलाड़ी तैयार करने की जरूरत है, जो बड़े टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंचने के साथ खिताब जीतने की क्षमता भी विकसित करें।

टीम के योगदान को श्रेय देना भी महत्वपूर्ण

सिंधु ने अपनी टीम के प्रति आभार जताया। यह पहलू खेल की एक महत्वपूर्ण सच्चाई को सामने लाता है। मैदान पर पदक खिलाड़ी के नाम होता है, लेकिन उसके पीछे कोच, फिजियोथेरेपिस्ट, फिटनेस विशेषज्ञ और सहयोगी स्टाफ की सामूहिक मेहनत रहती है।

लंबे करियर में खिलाड़ी को शारीरिक थकान के साथ मानसिक दबाव और प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में सही मार्गदर्शन और सहयोग उसे फिर से बेहतर प्रदर्शन करने में मदद कर सकता है।

इसलिए सिंधु की उपलब्धि को केवल व्यक्तिगत सफलता के तौर पर नहीं, बल्कि एक ऐसी टीम की मेहनत के परिणाम के रूप में भी देखा जाना चाहिए, जिसने उनके सफर में साथ दिया।

रजत पदक अंत नहीं, अगली चुनौती की शुरुआत

पीवी सिंधु का फ्रेंच ओपन फाइनल तक पहुंचना भारतीय खेल जगत के लिए सकारात्मक संकेत है। यह उपलब्धि बताती है कि कठिन दौर और निराशाजनक परिणामों के बावजूद लक्ष्य के प्रति समर्पण बनाए रखना कितना जरूरी है।

सिंधु स्वर्ण पदक चाहती थीं और उनकी यह इच्छा स्वाभाविक है। एक शीर्ष खिलाड़ी के लिए दूसरा स्थान संतोष के साथ-साथ आगे बेहतर करने की प्रेरणा भी बन सकता है। अब उनके सामने चुनौती इस प्रदर्शन को निरंतरता में बदलने और आगामी प्रतियोगिताओं में खिताब के लिए मजबूत दावेदारी पेश करने की होगी।

खेल में महानता केवल जीतने से नहीं, बल्कि हार के बाद वापसी करने, अपनी कमियों को पहचानने और लगातार प्रतिस्पर्धा करते रहने से भी बनती है। फ्रेंच ओपन में सिंधु का रजत पदक इसी संघर्ष की कहानी कहता है—मंजिल अभी बाकी है, लेकिन आगे बढ़ने का हौसला कायम है।

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क्राइम

मेसर्स ट्रांसभारत एविएशन का हेलीकॉप्टर जोशीमठ में दुर्घटनाग्रस्त

30 अक्टूबर 2026 को मेसर्स ट्रांसभारत एविएशन प्रा. लि. के पंजीयन VT‑HCXX (टाइप AS350B3) वाले हेलीकॉप्टर ने बद्रीनाथ हेलिपैड से 13:14 बजे उड़ान भरकर सहस्त्रधारा हेलिपैड (देहरादून) की दिशा में यात्रा करते हुए जोशीमठ के चाय गांव के पास जंगल में दुर्घटनाग्रस्त हो गया।

हेलीकॉप्टर पर एक पायलट और पाँच यात्री सवार थे। दुर्घटना के मलबे का पता चल चुका है और खोज व बचाव अभियान जारी है।

जांच की शुरुआत

नागरिक उड्डयन महानिदेशालय की एक टीम देहरादून भेजी गई है ताकि दुर्घटना की प्रारंभिक जांच की जा सके।

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जयपुर

जयपुर में पंचायतीराज द्वितीय चरण में सरपंच पदों पर 86.48% मतदान

जयपुर जिले की पाँच पंचायत समितियों की 112 ग्राम पंचायतों में सरपंच पदों के लिए 30 अक्टूबर को हुए मतदान में कुल 86.48 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया।

जिला निर्वाचन अधिकारी संदेश नायक के अनुसार 3,78,364 पंजीकृत मतदाताओं में से 3,27,224 ने अपना मत दिया। जालसू में 88.89 प्रतिशत, रामपुरा डाबड़ी में 88.57 प्रतिशत और अमरसर में 84.24 प्रतिशत मतदान हुआ।

पंचायती राज चुनाव की प्रमुख आँकड़े

संदेश नायक ने बताया कि अमरसर, आमेर, जालसू, रामपुरा डाबड़ी और शाहपुरा पंचायत समितियों में क्रमशः 84.24%, 85.98%, 88.89%, 88.57% और 84.70% मतदान हुआ। जालसू में सर्वाधिक टर्नआउट दर्ज किया गया।

कुल मतदाता: 3,78,364 कुल मतदान: 3,27,224 (86.48%) जालसू में सर्वाधिक मतदान: 88.89% रामपुरा डाबड़ी में दूसरा उच्चतम: 88.57%

समाचार जगत के अनुसार, मतदान सुबह 7 बजे शुरू होकर शाम 6 बजे तक जारी रहा और मतपत्रों की गिनती रात तक की जाएगी। उपसरपंच का चुनाव 31 अक्टूबर को निर्धारित है।

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राजनीति

युवाओं में चुनावी जागरूकता बढ़ाने के लिए 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ‘विकसित भारत युवा संवाद: अपना वोट जानें’ के 46 कार्यक्रम आयोजित किए गए

युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के युवा कार्यक्रम विभाग के अंतर्गत मेरा युवा भारत (माय भारत) द्वारा आज 21 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आयोजित ‘विकसित भारत युवा संवाद: अपना वोट जानें’ के 46 कार्यक्रमों में कुल 6,688 युवाओं ने भाग लिया। 26 अक्टूबर से 5 नवंबर 2026 तक चलाए जा रहे इस राष्ट्रव्यापी अभियान का उद्देश्य देशभर के 500 विश्वविद्यालयों , कॉलेजों और शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंच बनाना है।

इस पहल का उद्देश्य युवाओं , विशेषकर पहली बार मतदान करने वाले मतदाताओं में चुनावी जागरूकता बढ़ाना और उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सोच-समझकर भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करना है। इसका उद्देश्य युवाओं को मतदान के अधिकारों , चुनावी प्रक्रियाओं और नागरिक जिम्मेदारियों से परिचित कराना है। साथ ही , उन्हें निर्वाचित जनप्रतिनिधियों , युवा आइकॉन और अन्य प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के साथ लोकतांत्रिक भागीदारी तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी भूमिका पर संवाद करने का अवसर प्रदान करना है।

आज आयोजित कार्यक्रमों का विस्तार देश के विभिन्न क्षेत्रों तक रहा। इनमें उत्तर भारत के जम्मू-कश्मीर , हिमाचल प्रदेश , पंजाब , हरियाणा , उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश से लेकर पूर्वोत्तर के अरुणाचल प्रदेश , मेघालय , नागालैंड और सिक्किम के राज्य शामिल रहे। इसके अलावा , पूर्वी , मध्य , पश्चिमी और दक्षिणी भारत के बिहार , झारखंड , ओडिशा , पश्चिम बंगाल , छत्तीसगढ़ , मध्य प्रदेश , गुजरात , महाराष्ट्र , राजस्थान , कर्नाटक और तमिलनाडु में भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। 30 अक्टूबर 2026 तक , 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 96 युवा संवाद आयोजित किए जा चुके हैं , जिनमें 18,475 युवाओं और 97 युवा आइकॉन ने भाग लिया है।

पंजाब में आज फरीदकोट , फतेहगढ़ साहिब , गुरदासपुर और मोगा में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रमों में युवा आइकॉन मास्टर सैयम मजूमदार , अंतरराष्ट्रीय रग्बी खिलाड़ी अमनदीप कौर , श्री दिवजोत सिंह और श्री शशिकेश कुमार के साथ संवाद सत्र आयोजित किए गए। चर्चाओं में जागरूक लोकतांत्रिक भागीदारी , जिम्मेदार नागरिकता और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने में युवाओं की भूमिका पर जोर दिया गया।

जम्मू-कश्मीर के डोडा और पुंछ में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रमों में चुनावी जागरूकता , नागरिक जिम्मेदारी और शासन व्यवस्था में युवाओं की भागीदारी जैसे विषयों पर संवाद एवं चर्चा की गई। लैक्रोस एथलीट सुश्री अभिलव कौर ने पुंछ में छात्रों से बातचीत की , जबकि डोडा में प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से सवाल पूछे और पहली बार वोट देने वालों और ज़िम्मेदार नागरिक होने के महत्व पर अपने विचार शेयर किए।

मध्य प्रदेश के छतरपुर और ग्वालियर में आयोजित कार्यक्रमों में निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ युवा नेतृत्व और विकसित भारत के दृष्टिकोण पर संवाद किया गया। ग्वालियर में युवा आइकॉन श्री विक्रम बघेल ने अपनी प्रस्तुति दी। इस दौरान खेल जगत की प्रेरणादायक कहानियां साझा की गईं और लोकतांत्रिक शपथ भी दिलाई गई। खंडवा (पूर्व निमाड़) में युवा प्रतिभागियों ने निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के साथ संवाद सत्र में सक्रिय रूप से भाग लिया।

छत्तीसगढ़ के चांपा में जांजगीर-चांपा की सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े ने युवा प्रतिभागियों के साथ संवाद किया और उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं तथा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया। कार्यक्रम में नशा मुक्त भारत अभियान के तहत योग और ध्यान सत्र भी आयोजित किया गया। इसमें तनाव प्रबंधन , मानसिक स्वास्थ्य और स्वस्थ जीवनशैली पर ध्यान केंद्रित किया गया।

अन्य राज्यों में भी युवा संवाद कार्यक्रमों के दौरान नागरिक जागरूकता , युवाओं की भागीदारी और राष्ट्र निर्माण को बढ़ावा देने वाली गतिविधियां आयोजित की गईं। उत्तराखंड के चमोली जिले के गोपेश्वर में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में 200 युवाओं ने भाग लिया। बिहार के वैशाली में प्रतिभागियों ने जिम्मेदार नागरिकता के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए लोकतांत्रिक शपथ ली। राजस्थान के बूंदी और दौसा में आयोजित कार्यक्रमों में मतदाता जागरूकता और नशामुक्त जीवनशैली को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। दौसा में मतदान के महत्व को लेकर नुक्कड़ नाटक भी आयोजित किया गया। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में नशामुक्ति जागरूकता सत्र और विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (वीबीवाईएलडी) पर व्याख्यान आयोजित किया गया। वहीं , श्रावस्ती में नशामुक्त भारत के लिए युवाओं को जागरूक और संगठित करने के साथ-साथ पड़ोस युवा संसद का आयोजन भी किया गया।

तमिलनाडु के मदुरै में आयोजित युवा संवाद कार्यक्रम में महिला आरक्षण विधेयक पर संसद की कार्यवाही की तर्ज पर चर्चा हुई। इस दौरान युवा प्रतिभागियों को महिलाओं के प्रतिनिधित्व और समावेशी शासन व्यवस्था जैसे विषयों पर अपने विचार रखने का अवसर मिला।

अब तक 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 96 कार्यक्रम आयोजित किए जा चुके हैं। इस अभियान के तहत चर्चाओं , जनप्रतिनिधियों और युवा आइकॉन के साथ संवाद तथा लोकतांत्रिक जागरूकता , जिम्मेदार नागरिकता और युवा नेतृत्व को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों के माध्यम से युवाओं की भागीदारी लगातार सुनिश्चित की जा रही है।

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संक्षेप में

केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के सहयोग से, डाक विभाग ने स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए स्मारक डाक टिकट जारी किए

उदयपुर के महेंद्र कुमार को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति छात्रवृत्ति योजना से ₹24 लाख की सहायता

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राजस्थान री बात

हर दिन मरुधरा की एक कहावत, एक सबद, एक ज़िलो

आज री कहावत

“पाणी पीजे छाण कर, गुरु कीजे जाण कर”

पानी छानकर पियो और गुरु सोच-समझकर बनाओ।

आज रो सबद

मनवार

मेहमान को प्रेम से आग्रह करके खिलाना-पिलाना

आज रो ज़िलो

चित्तौड़गढ़

  • चित्तौड़गढ़ किला
  • विजय स्तंभ
  • मीरा बाई

मेळा-तेवार

इस महीने: पुष्कर मेला, बूंदी उत्सव

कुंभलगढ़ महोत्सव

राजसमंद · दिसंबर

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