जैसलमेर जिले में इस बार दीपावली के त्योहारी सीजन के दौरान बाजारों में लेन‑देन का तरीका बदलता नजर आया है। मिठाई की दुकानों से लेकर कपड़ों के शोरूम और सजावटी सामान के काउंटरों पर ग्राहकों ने नकदी के बजाय मोबाइल फोन के जरिए भुगतान करना चुना।
सरहदी जिले के बाजारों में यूपीआई के बढ़ते उपयोग से न केवल ग्राहकों की सुविधा बढ़ी है, बल्कि छोटे कारोबारियों के दैनिक व्यापार और भुगतान प्रबंधन में भी बदलाव आया है। त्योहार के वक्त एक ही ग्राहक कई जगहों पर खरीदारी करता है; ऐसे में मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर भुगतान करने से खुले पैसे की समस्या से राहत मिली है।
छोटे व्यापारियों को मिल रहा फायदा
डिजिटल भुगतान का असर अब केवल बड़े प्रतिष्ठानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटे स्थानीय कारोबारियों की दुकानों तक भी पहुंच चुका है। दुकानदारों के लिए सबसे बड़ा लाभ डिजिटल रिकॉर्ड मिलना है, जिससे बार‑बार हिसाब‑मिलाना कम हो गया और ग्राहकों को त्वरित भुगतान पुष्टि मिलती है।
विशेषज्ञ की राय और सावधानियां
डिजिटल भुगतान विशेषज्ञ महेश पुरोहित के अनुसार, त्योहारी दबाव के दौरान यूपीआई से भुगतान करने पर ग्राहकों को नकदी और छुट्टे की समस्या से मुक्ति मिलती है और दुकानदारों का दैनिक हिसाब‑किताब व्यवस्थित रहता है। उन्होंने सलाह दी है कि कारोबारियों और ग्राहकों को भुगतान की पुष्टि किए बिना सामान नहीं सौंपना चाहिए तथा फर्जी संदेशों व साइबर ठगी से सतर्क रहना चाहिए।
- भुगतान का नया माध्यम: नकदी के साथ यूपीआई खरीदारी का सहज विकल्प बना।
- छोटे व्यापार को सहारा: स्थानीय दुकानदार भी डिजिटल लेनदेन व्यवस्था अपना रहे हैं।
- समय की बचत: भुगतान और उसकी पुष्टि की प्रक्रिया पहले से आसान हुई।
- हिसाब में पारदर्शिता: डिजिटल ट्रांजेक्शन का रिकॉर्ड कारोबारियों के लिए उपयोगी है।
- साइबर सुरक्षा की चुनौती: भुगतान से पहले सही नाम और खाते की पुष्टि जरूरी है।

