केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने गोवा में आयोजित चौथे खनन मंत्रियों के सम्मेलन में भारत के कोयला और खनन क्षेत्रों की परिवर्तनकारी यात्रा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि निरंतर सुधारों से पारदर्शिता और दक्षता में वृद्धि हुई है।

यह सम्मेलन 5 से 6 नवंबर 2026 को गोवा में आयोजित किया गया, जिसमें विभिन्न राज्यों के खनन मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन का उद्देश्य खनन और कोयला क्षेत्र की चुनौतियों और संभावनाओं पर चर्चा करना था।

कोयला गैसीकरण और क्रिटिकल मिनरल्स पर जोर

श्री जी. किशन रेड्डी ने कोयला संसाधनों के इष्टतम उपयोग के लिए कोयला गैसीकरण को तेज करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इससे औद्योगिक विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

बदलते भू-राजनीतिक परिदृश्य में क्रिटिकल मिनरल्स के महत्व को रेखांकित करते हुए उन्होंने घरेलू अन्वेषण और पुनर्चक्रण क्षमताओं को मजबूत करने की बात कही। साथ ही, खदान संचालन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटलीकरण के उपयोग का आग्रह किया।

घरेलू कोयला उत्पादन में वृद्धि

कोयला मंत्रालय के सचिव श्री विक्रम देव दत्त ने बताया कि घरेलू कोयला उत्पादन लगातार दूसरे वर्ष एक अरब टन से अधिक रहा है। यह भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है।

कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने सतत एवं जिम्मेदार खनन, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय समुदायों के कल्याण को प्राथमिकता देने पर जोर दिया।