जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में कैप्टिव ब्रीडिंग कार्यक्रम के तहत तीन और गोडावण पक्षियों को प्राकृतिक माहौल में स्वतंत्र रूप से छोड़ दिया गया। इनकी उम्र करीब छह महीने है। इन्हें सुदासरी क्षेत्र में तय नियमों के तहत खुले जंगल में भेजा गया।

इस प्रक्रिया के बाद जंगल में छोड़े गए कृत्रिम रूप से पाले गए गोडावणों की कुल संख्या अब सात हो गई है। राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक मिलकर इस संरक्षण योजना पर काम कर रहे हैं।

सॉफ्ट रिलीज तकनीक और निगरानी

वन अधिकारियों ने इन पक्षियों को सीधे खुले वातावरण में भेजने की बजाय 'सॉफ्ट रिलीज तकनीक' अपनाई। इसके तहत पक्षियों को पहले सुदासरी क्षेत्र के एक विशेष बाड़े में रखा गया। मकसद यह था कि वे धीरे-धीरे प्राकृतिक परिवेश के आदि बन सकें।

जंगल में भेजने से पहले तीनों गोडावणों के शरीर पर सैटेलाइट टैग बांधे गए। वैज्ञानिकों की टीम इन उपकरणों के जरिए पक्षियों की हरकतों, उनके क्षेत्र और व्यवहार पर लगातार नजर रखेगी। इससे यह परखा जा रहा है कि वे नई परिस्थितियों में कैसे ढल रहे हैं।

पृष्ठभूमि और आगे की योजना

इससे पहले अक्टूबर की शुरुआत में चार गोडावणों को जंगल में उतारा गया था। इनमें से एक पक्षी की मरुस्थलीय लोमड़ी के हमले से मौत हो गई थी। इस घटना के बाद विशेषज्ञों ने सुरक्षा इंतज़ामों और तौर-तरीकों की गहन समीक्षा की थी।

इस पायलट प्रोजेक्ट के प्रथम चरण के दौरान कुल 11 कैप्टिव ब्रीड गोडावणों को प्राकृतिक आवास में भेजने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।