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परंपरा

राजस्थान के मेले और त्योहार

राजस्थान के बड़े मेले और त्योहार, इस महीने से शुरू करके — हर एक की तिथि, स्थान और परंपरा। ज़्यादातर मेले हिंदू पंचांग से लगते हैं, इसलिए उनकी अंग्रेज़ी तारीख़ हर साल बदलती है।

नवंबर इस महीने

पुष्कर मेला ›

कार्तिक शुक्ल एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा · पुष्कर, अजमेर (अजमेर ज़िला)

ब्रह्मा जी की नगरी में पवित्र सरोवर पर स्नान, दुनिया का प्रसिद्ध ऊँट-पशु मेला, मूँछ और मटका-फोड़ प्रतियोगिताएँ — देश-विदेश से पर्यटक आते हैं।

आम तौर पर: अक्टूबर / नवंबर

चंद्रभागा मेला ›

कार्तिक पूर्णिमा · झालरापाटन, झालावाड़ (झालावाड़ ज़िला)

चंद्रभागा नदी के तट पर स्नान और हाड़ौती का बड़ा पशु मेला; प्राचीन मंदिरों की नगरी झालरापाटन में।

आम तौर पर: अक्टूबर / नवंबर

बूंदी उत्सव ›

कार्तिक (पर्यटन विभाग की ओर से तय तारीख़ें) · बूंदी (बूंदी ज़िला)

बावड़ियों और चित्रशाला की नगरी में शोभायात्रा, लोक-कला, साफ़ा बाँधने और मूँछ प्रतियोगिताएँ।

आम तौर पर: अक्टूबर / नवंबर

जनवरी

मकर संक्रांति — पतंग उत्सव ›

14 जनवरी (मकर संक्रांति, हर वर्ष लगभग यही तारीख़) · जयपुर (जयपुर ज़िला)

जयपुर की छतों से दिन भर पतंगबाज़ी, "वो काटा!" की गूँज, तिल-गुड़ के पकवान और शाम को आसमान में दीये वाली पतंगें।

आम तौर पर: जनवरी

ऊँट उत्सव ›

जनवरी (पर्यटन विभाग की ओर से तय तारीख़ें) · बीकानेर (बीकानेर ज़िला)

रेगिस्तान के जहाज़ ऊँट का उत्सव — सजे-धजे ऊँटों की परेड, ऊँट नृत्य, ऊँटनी के दूध से बनी मिठाइयाँ और लोक-संगीत।

आम तौर पर: जनवरी

नागौर पशु मेला (रामदेव पशु मेला) ›

माघ शुक्ल पक्ष · नागौर (नागौर ज़िला)

देश के सबसे बड़े पशु मेलों में से एक — नागौरी बैलों, ऊँटों और घोड़ों की ख़रीद-फ़रोख़्त, साथ में लोक खेल और प्रतियोगिताएँ।

आम तौर पर: जनवरी / फ़रवरी

बेणेश्वर मेला ›

माघ पूर्णिमा · बेणेश्वर धाम, डूंगरपुर (डूंगरपुर ज़िला)

सोम, माही और जाखम नदियों के संगम पर लगने वाला यह मेला "आदिवासियों का कुंभ" कहलाता है — संगम स्नान, भजन और जनजातीय संस्कृति।

आम तौर पर: जनवरी / फ़रवरी

फ़रवरी

मरु महोत्सव ›

माघ पूर्णिमा के आसपास (फ़रवरी) · जैसलमेर (जैसलमेर ज़िला)

सोनार क़िले और सम के धोरों पर थार का उत्सव — मिस्टर डेज़र्ट प्रतियोगिता, ऊँट दौड़, कालबेलिया नृत्य और लोक-संगीत की रातें।

आम तौर पर: फ़रवरी

खाटूश्यामजी का लक्खी मेला ›

फाल्गुन शुक्ल पक्ष (एकादशी-द्वादशी मुख्य दिन) · खाटू, सीकर (सीकर ज़िला)

बाबा श्याम के दर्शन के लिए देश भर से लाखों श्रद्धालु निशान (ध्वज) लेकर पैदल यात्रा करते हुए खाटू पहुँचते हैं।

आम तौर पर: फ़रवरी / मार्च

मार्च

गणगौर ›

चैत्र शुक्ल तृतीया · जयपुर और पूरे राजस्थान में (जयपुर ज़िला)

होली के बाद सोलह दिन तक स्त्रियाँ गौरी (पार्वती) की पूजा करती हैं; अंतिम दिन जयपुर में गणगौर माता की शाही सवारी निकलती है।

आम तौर पर: मार्च / अप्रैल

कैला देवी मेला ›

चैत्र नवरात्र (अष्टमी मुख्य दिन) · कैला देवी, करौली (करौली ज़िला)

कैला देवी के इस लक्खी मेले में दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं; लांगुरिया लोकगीत इस मेले की ख़ास पहचान हैं।

आम तौर पर: मार्च / अप्रैल

श्री महावीरजी मेला ›

चैत्र शुक्ल त्रयोदशी (महावीर जयंती) के आसपास · श्री महावीरजी, करौली (करौली ज़िला)

जैन धर्म के प्रमुख तीर्थ पर भगवान महावीर की रथयात्रा; जैन और स्थानीय समुदाय मिलकर यह मेला मनाते हैं।

आम तौर पर: मार्च / अप्रैल

करणी माता मेला ›

चैत्र और आश्विन नवरात्र · देशनोक, बीकानेर (बीकानेर ज़िला)

देशनोक के करणी माता मंदिर में नवरात्र के मेले — मंदिर अपने हज़ारों "काबा" (चूहों) के लिए दुनिया भर में जाना जाता है।

आम तौर पर: मार्च / अप्रैल / सितंबर / अक्टूबर

सालासर बालाजी मेला ›

चैत्र पूर्णिमा और आश्विन पूर्णिमा · सालासर, चूरू (चूरू ज़िला)

सालासर बालाजी (हनुमानजी) के दर्शन के लिए साल में दो बड़े मेले; श्रद्धालु नारियल बाँधकर मनौती माँगते हैं।

आम तौर पर: मार्च / अप्रैल / सितंबर / अक्टूबर

जुलाई

अगस्त

गोगामेड़ी मेला ›

भाद्रपद (गोगा नवमी के आसपास) · गोगामेड़ी, हनुमानगढ़ (हनुमानगढ़ ज़िला)

लोक देवता गोगाजी की समाधि पर लगने वाला मेला — हिंदू और मुस्लिम दोनों श्रद्धालु आते हैं; गोगाजी को "जाहरवीर" भी कहते हैं।

आम तौर पर: अगस्त / सितंबर

रामदेवरा मेला ›

भाद्रपद शुक्ल द्वितीया से एकादशी · रामदेवरा (रुणीचा), जैसलमेर (जैसलमेर ज़िला)

लोक देवता बाबा रामदेव की समाधि पर देश के सबसे बड़े मेलों में से एक — लाखों जातरू पैदल आते हैं; बाबा रामदेव सभी धर्मों में पूजे जाते हैं।

आम तौर पर: अगस्त / सितंबर

तेजाजी मेला ›

भाद्रपद शुक्ल दशमी (तेजा दशमी) · परबतसर, डीडवाना-कुचामन (डीडवाना-कुचामन ज़िला)

वचन के पक्के लोक देवता वीर तेजाजी की याद में पशु मेला और भजन; तेजा दशमी पर पूरे राजस्थान में तेजाजी के थानों पर मेले लगते हैं।

आम तौर पर: अगस्त / सितंबर

अक्टूबर

मारवाड़ महोत्सव ›

आश्विन पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) · जोधपुर (जोधपुर ज़िला)

मारवाड़ के लोक नायकों की याद में मेहरानगढ़ और उम्मेद भवन की पृष्ठभूमि में लोक-संगीत और नृत्य का उत्सव।

आम तौर पर: अक्टूबर

राजस्थान री बात

हर दिन मरुधरा की एक कहावत, एक सबद, एक ज़िलो

आज री कहावत

“पाणी पीजे छाण कर, गुरु कीजे जाण कर”

पानी छानकर पियो और गुरु सोच-समझकर बनाओ।

आज रो सबद

मनवार

मेहमान को प्रेम से आग्रह करके खिलाना-पिलाना

आज रो ज़िलो

चित्तौड़गढ़

  • चित्तौड़गढ़ किला
  • विजय स्तंभ
  • मीरा बाई

मेळा-तेवार

इस महीने: पुष्कर मेला, बूंदी उत्सव

कुंभलगढ़ महोत्सव

राजसमंद · दिसंबर

राजस्थान दर्शन →