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जनरल और मंत्री

भामाशाह

1547–1600

भामाशाह (28 June 1547 – 1600) एक जैन व्यापारी थे जिन्होंने महाराणा प्रताप सिंह I के जनरल, मंत्री और करीबी सहयोगी के रूप में कार्य किया। उनके वित्तीय योगदान से हल्दीघाटी की लड़ाई के बाद मेवाड़ की सेना का पुनर्स्थापन संभव हुआ।

प्रारम्भिक जीवन

भामाशाह का जन्म 28 जून 1547 को श्वेतांबर मूरतपूजक जैन ओसवाल परिवार में हुआ। उनके पिता, भर्मल कवड़िया, रणथंभौर किले के गढ़पति के रूप में राणा संग्राम सिंह के अधीन और बाद में राणा उदय सिंह II के प्रधान मंत्री रहे।

वे चित्तौड़ के नगरसेठ पद पर कार्यरत थे, फिर मेवाड़ के दरबार के मामलों में शामिल हुए।

जीवन और कार्य

महँगी हल्दीघाटी की लड़ाई के बाद महाराणा प्रताप वित्तीय संकट में थे, तब भामाशाह और उनके भाई तराचंद ने महाराणा को 2,000,000 सोने के सिक्के और 25,000,000 चांदी के रुपये प्रदान किए। इस धन से मेवाड़ की सेना का पुनर्गठन और मुगलों के खिलाफ आगे के अभियानों को सम्भव बनाया गया।

उनके समर्थन के सम्मान में महाराणा प्रताप ने भामाशाह को प्रधान मंत्री नियुक्त किया, जबकि तराचंद को गोदवाड़ क्षेत्र का गवर्नर बनाया गया। बाद में भामाशाह ने अमर सिंह I के अधीन मेवाड़ के कोषाध्यक्ष के रूप में सेवा की।

विरासत और स्मृति

भामाशाह की जन्मतिथि, जिसे भामाशाह जयंती कहा जाता है, हर साल मनाई जाती है। उदयपुर में उनके सम्मान में एक स्मारक स्थापित है, और भारत सरकार ने 2000 में उनके सम्मान में एक डाक टिकट जारी किया।

महाराणा ऑफ़ मेवाड़ चैरिटेबल फाउंडेशन ने उत्कृष्ट राजस्थानी छात्रों के लिए "भामा शाह अवार्ड" स्थापित किया, और राजस्थान सरकार ने उनके नाम पर भामाशाह योजना शुरू की। उनका जीवन फिल्मों में भी दिखाया गया है, जैसे 1926 की साइलेंट फिल्म *Diwan Bhamansha* और 2017 की फीचर फ़िल्म *Bhamashah*।

आधार: विकिपीडिया लेख (CC BY-SA 4.0) — तथ्य उसी स्रोत से; अनुवाद और संपादन टाइम्स ऑफ़ राजस्थान।

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