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अलका याग्निक

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राजस्थानी लोक गीत 'थारे वास्ते रे ढोला' का रंगीन दृश्य

‘थारे वास्ते रे ढोला’ 37 साल बाद भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद

जे.पी. दत्ता की 1989 की फिल्म ‘बटवारा’ का गीत ‘थारे वास्ते रे ढोला’ आज भी राजस्थानी लोक रंग और तीन दिग्गज गायिकाओं की आवाज़ से संगीत प्रेमियों को मंत्रमुग्ध कर रहा है.

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राजस्थान री बात

हर दिन मरुधरा की एक कहावत, एक सबद, एक ज़िलो

आज री कहावत

“पाणी पीजे छाण कर, गुरु कीजे जाण कर”

पानी छानकर पियो और गुरु सोच-समझकर बनाओ।

आज रो सबद

मनवार

मेहमान को प्रेम से आग्रह करके खिलाना-पिलाना

आज रो ज़िलो

चित्तौड़गढ़

  • चित्तौड़गढ़ किला
  • विजय स्तंभ
  • मीरा बाई

मेळा-तेवार

इस महीने: पुष्कर मेला, बूंदी उत्सव

कुंभलगढ़ महोत्सव

राजसमंद · दिसंबर

राजस्थान दर्शन →