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खेल महल

राजा से शतरंज की बाज़ी, थार में ऊँट दौड़, जयपुर की छतों पर पतंगबाज़ी — खेलिए, सीखिए और अपने ज़िले का नाम शाही सूची में लिखाइए।

नया · शाही बिसातशतरंजशाही बिसात पर राजा से मुक़ाबला — हाथी, ऊँट, घोड़े और वज़ीर के साथतीन स्तर — सिपाही, सरदार, महाराजा · 3D बिसात · हर चाल पर शाही सीखअभी कोई चैंपियन नहीं — पहले बनिए!बाज़ी शुरू करें

इस हफ़्ते की ज़िलों की होड़

हर खेल में इस हफ़्ते ज़िले का सर्वश्रेष्ठ स्कोर, 100 में बदलकर जोड़ा गया। हर सोमवार नई होड़ — अपने स्कूल या मोहल्ले के साथ ज़िले को ऊपर लाइए।

पहला अंक आपके ज़िले का हो सकता है — कोई भी खेल खेलिए!

स्कूलों की साप्ताहिक होड़

"राजा का सवाल" और "शतरंज पहेली" में इस हफ़्ते हर स्कूल का सबसे अच्छा स्कोर। स्कोर दर्ज करते समय अपने स्कूल का नाम लिखिए — हर सोमवार नई होड़।

इस हफ़्ते अभी किसी स्कूल ने खेला नहीं — आपका स्कूल पहला हो सकता है!

खेल-खेल में जानिए

  • शतरंज का पूर्वज "चतुरंग" भारत में गुप्त काल (लगभग छठी सदी) में खेला जाता था।
  • शतरंज पहेली में एक ख़ास चाल छिपी होती है — काँटा, पिन या बलिदान — जो खेल पलट देती है।
  • चौपड़ धन (+) आकार के कपड़े की बिसात पर खेली जाती है — हर भुजा में 3 × 8 = 24 खाने होते हैं।
  • ऊँट राजस्थान का राज्य पशु है — 2014 में यह दर्जा मिला।
  • जयपुर में मकर संक्रांति (14 जनवरी) पर पूरा शहर छतों पर चढ़कर पतंग उड़ाता है।
  • राजस्थान क्षेत्रफल में भारत का सबसे बड़ा राज्य है — लगभग 3.42 लाख वर्ग किमी।

राजस्थान के पारंपरिक खेल

आँगन, चौपाल और दरबार के खेल — इनमें से कुछ जल्द ही डिजिटल रूप में खेल महल में।

  • चौपड़ (पचीसी)

    कपड़े की धन-आकार बिसात, कौड़ियों के पासे और चार रंगों की गोटियाँ। राजदरबारों से लेकर गाँव की चौपाल तक खेली जाती रही।

    अब खेलें
  • सतोलिया (पिट्ठू)

    सात चपटे पत्थरों का ढेर गेंद से गिराइए — फिर विरोधी टीम की गेंद से बचते हुए उन्हें दोबारा जमाइए।

  • गिल्ली-डंडा

    डंडे से गिल्ली को उछालकर मारना और दूरी नापना — गली-मोहल्लों का सबसे पुराना खेल।

  • कबड्डी

    एक साँस में "कबड्डी-कबड्डी" बोलते हुए विरोधी पाले में जाकर छूना और लौट आना — ताक़त और फुर्ती का खेल।

  • गुट्टे

    पाँच छोटे पत्थर उछालकर हथेली और हाथ के पिछले हिस्से पर पकड़ना — आँगन में बैठकर खेला जाने वाला खेल।

राजस्थान री बात

हर दिन मरुधरा की एक कहावत, एक सबद, एक ज़िलो

आज री कहावत

“पाणी पीजे छाण कर, गुरु कीजे जाण कर”

पानी छानकर पियो और गुरु सोच-समझकर बनाओ।

आज रो सबद

मनवार

मेहमान को प्रेम से आग्रह करके खिलाना-पिलाना

आज रो ज़िलो

चित्तौड़गढ़

  • चित्तौड़गढ़ किला
  • विजय स्तंभ
  • मीरा बाई

मेळा-तेवार

इस महीने: पुष्कर मेला, बूंदी उत्सव

कुंभलगढ़ महोत्सव

राजसमंद · दिसंबर

राजस्थान दर्शन →