मायड़ भासा
आज का राजस्थानी शब्द
रोज़ एक राजस्थानी शब्द — उसका अर्थ और रोज़ की बोलचाल का उदाहरण। अपनों के साथ साझा कीजिए।
आज का शब्द
म्हैं
मैं
“म्हैं जयपुर जाऊँ हूँ।”
मैं जयपुर जा रहा हूँ।
सभी शब्द
- खम्मा घणी
- आदर भरा अभिवादन — नमस्कार
- “खम्मा घणी सा, पधारो!” — नमस्कार जी, आइए!
- पधारो
- आइए (आदर से बुलाना)
- “म्हारे घरे पधारो सा।” — मेरे घर आइए जी।
- म्हारो
- मेरा
- “ओ म्हारो गाँव है।” — यह मेरा गाँव है।
- थारो
- तुम्हारा
- “थारो नाम कांई है?” — तुम्हारा नाम क्या है?
- कांई
- क्या
- “थूं कांई करै है?” — तुम क्या कर रहे हो?
- घणो
- बहुत
- “आज घणो तावड़ो है।” — आज बहुत धूप है।
- तावड़ो
- धूप
- “तावड़ै में मत जा।” — धूप में मत जाओ।
- टाबर
- बच्चे
- “टाबर स्कूल ग्या।” — बच्चे स्कूल गए।
- छोरो
- लड़का (छोरी — लड़की)
- “छोरो खेत में है।” — लड़का खेत में है।
- ढाणी
- खेतों में बसे कुछ घरों की छोटी बस्ती
- “म्हारी ढाणी गाँव सूं दो कोस है।” — हमारी ढाणी गाँव से दो कोस दूर है।
- जीमण
- भोजन, दावत
- “आज ब्याव रो जीमण है।” — आज शादी की दावत है।
- ब्याव
- विवाह
- “काकी रै ब्याव में सगळा आसी।” — चाची की शादी में सब आएँगे।
- बीनणी
- बहू, दुल्हन
- “बीनणी घर आई।” — बहू घर आई।
- भायलो
- दोस्त
- “ओ म्हारो भायलो है।” — यह मेरा दोस्त है।
- पावणा
- मेहमान
- “पावणा पधार्या है।” — मेहमान आए हैं।
- धोरा
- रेत के टीले
- “धोरां री धरती घणी सोवणी।” — रेत के टीलों की धरती बहुत सुंदर है।
- मेह
- बारिश
- “मेह बरस्यो, खेत हरिया हुया।” — बारिश हुई, खेत हरे हो गए।
- रूंख
- पेड़
- “आंगणै में रूंख लगाओ।” — आँगन में पेड़ लगाओ।
- कोनी
- नहीं
- “म्हैं आज कोनी जाऊँ।” — मैं आज नहीं जाऊँगा।
- म्हैं
- मैं
- “म्हैं जयपुर जाऊँ हूँ।” — मैं जयपुर जा रहा हूँ।
- थूं
- तू, तुम
- “थूं कद आसी?” — तुम कब आओगे?
- आपां
- हम (सब)
- “आपां साथै चालां।” — हम साथ चलें।
- सगळा
- सब
- “सगळा मेळै में ग्या।” — सब मेले में गए।
- कठै
- कहाँ
- “थूं कठै जावै?” — तुम कहाँ जा रहे हो?
- अठै
- यहाँ
- “अठै बैठो सा।” — यहाँ बैठिए जी।
- बठै
- वहाँ
- “बठै घणी भीड़ है।” — वहाँ बहुत भीड़ है।
- कद
- कब
- “मेळो कद लागसी?” — मेला कब लगेगा?
- सा
- आदर का शब्द — "जी"
- “हाँ सा, म्हैं आऊँ।” — हाँ जी, मैं आता हूँ।
- हुकम
- आदर भरा संबोधन; आज्ञा
- “हुकम, भोजन तैयार है।” — जी, भोजन तैयार है।
- मायड़
- माँ
- “मायड़ भासा राजस्थानी।” — मातृभाषा राजस्थानी।
- हेत
- प्रेम, स्नेह
- “दादी रो हेत घणो।” — दादी का स्नेह बहुत है।
- ओळूं
- याद
- “थारी ओळूं आवै।” — तुम्हारी याद आती है।
- हिवड़ो
- हृदय, दिल
- “म्हारो हिवड़ो राजी हुयो।” — मेरा दिल खुश हो गया।
- नैण
- आँखें
- “नैणां में नींद भरी।” — आँखों में नींद भरी है।
- रमणो
- खेलना
- “टाबर आंगणै में रमै।” — बच्चे आँगन में खेलते हैं।
- कागलो
- कौआ
- “मुंडेर पर कागलो बोल्यो — पावणा आसी।” — मुंडेर पर कौआ बोला — मेहमान आएँगे (लोक-मान्यता)।
- हाट
- बाज़ार
- “मंगळवार नै हाट लागै।” — मंगलवार को बाज़ार लगता है।
- गळी
- गली
- “म्हारी गळी में मंदिर है।” — मेरी गली में मंदिर है।
- फेर
- फिर
- “फेर मिलां सा।” — फिर मिलेंगे जी।
- चालो
- चलो
- “चालो, मेळो देखां।” — चलो, मेला देखें।
- मेळो
- मेला
- “पुष्कर रो मेळो घणो चावो।” — पुष्कर का मेला बहुत प्रसिद्ध है।
- बादळी
- छोटा बादल, बदली
- “आभै में बादळी छाई।” — आसमान में बदली छा गई।
- आभो
- आसमान
- “आभो नीलो है।” — आसमान नीला है।
- मोट्यार
- युवक, जवान
- “गाँव रा मोट्यार कबड्डी खेलै।” — गाँव के युवक कबड्डी खेलते हैं।
- लुगाई
- स्त्री
- “लुगायां गीत गावै।” — स्त्रियाँ गीत गाती हैं।