टाइम्स ऑफ़ राजस्थान · राजस्थान दर्शन
राजस्थान के लोक वाद्य संगीत की जीवंत यात्रा में आपका स्वागत है।
राजस्थान दर्शन · 1/4
रावणहत्था एक घोड़े की पीठ पर रखी हुई बांसुरी जैसी स्ट्रिंग वाद्य है, जिसकी ध्वनि गहरी और भावनात्मक होती है, जिससे श्रोताओं को ग्रामीण जीवन की सादगी का एहसास होता है।
Clément Bardot / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)
राजस्थान दर्शन · 2/4
मोरचंग एक छोटे, धातु के झंकार वाले झंझट जैसा वाद्य है, जिसकी तेज़ आवाज़ नाचते हुए लोगों को ऊर्जा से भर देती है।
Neek-Theri / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)
राजस्थान दर्शन · 3/4
अलगोजा दो जुड़ी हुई बांसुरीयों का सेट है, जिसकी मधुर ध्वनि दोहरी स्वर में बहती है और श्रोताओं को शांति का अनुभव कराती है।
Ihsanwayfarer / Wikimedia Commons (CC BY-SA 4.0)
राजस्थान दर्शन · 4/4
खड़ताल दो लकड़ी के टुकड़ों से बनी ताल वाद्य है, जिसकी खटखट आवाज़ गीत में लय जोड़ती है और लोगों को ताल में झूमने को प्रेरित करती है।
Imagedb / Wikimedia Commons (CC BY-SA 3.0)
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